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सिपाही की व्यस्त नौकरी में अपने सपने को सच करने वाले विनोद के मुरीद हुए वाराणसी पुलिस के मुखिया

Sun, 19 Jan 2020 07:22 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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कार्यालय में सिपाही विनोद यादव से बात करते वाराणसी एसएसपी - फोटो : amar ujala
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हाथ में डंडा लेकर लोगों को नियम-कायदा बताना और लगभग चौबीस घंटे की ड्यूटी में भी अथक परिश्रम कर अपने सपने को हकीकत में बदलने वाले सिपाही विनोद यादव की प्रतिभा और लगन के मुरीद वाराणसी पुलिस के मुखिया एसएसपी प्रभाकर चौधरी भी हो गए। तभी तो उन्होंने रविवार को न सिर्फ अपने कैंप कार्यालय में मिलने के लिए विनोद को आमंत्रित किया। बल्कि मुलाकात के दौरान एसएसपी ने विनोद की   खूब तारीफ भी की और भविष्य की शुभकामनाएं भी दी। विभाग के उच्चाधिकारी से इतनी आत्मीयता पाकर विनोद काफी भावुक नजर आए।  

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बताते चलें कि रोहनिया थाने में तैनात सिपाही विनोद यादव के असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के बाद परिवार के साथ ही अन्य भी उनको खुद के लिए प्रेरणास्त्रोत मान रहे हैं। क्योंकि जिंदगी के कठिन दौर में भी विनोद ने अपने सपने को बिखरने नहीं दिया और परिवार की आर्थिक दशा ठीक न होने की वजह से वर्ष 2011 में उन्होंने सिपाही की नौकरी कर ली। 

इसके बाद भी वह लगातार शिक्षा विभाग में नौकरी की तैयारी में लगे रहे। नौ साल बाद आखिर सफलता मिली। बातचीत में विनोद ने कहा कि सिपाही की ड्यूटी काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इसके साथ पढ़ाई करना मुश्किल है, मगर सपने साकार करने का जज्बा हो तो चुनौतियां प्रेरणा बन जाती हैं।

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परिजनों के साथ सिपाही विनोद - फोटो : amar ujala

आर्थिक स्थिति सुधरने पर अभ्यास शुरू कर दिया

विनोद ने बताया कि 15 जनवरी 2011 को सिपाही पद पर ज्वाइन किया था। जब लगा कि अब स्थिति थोड़ी बहुत सुधरी है तो आगे पढ़ाई करते रहने की प्रेरणा जगी और फिर अभ्यास शुरू कर दिया। ड्यूटी में जब भी समय मिला परीक्षा की तैयारी चलती रही।

बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में ही जाने का सपना था। इस उद्देश्य से कभी सब इंस्पेक्टर परीक्षा का आवेदन नहीं किया। वर्ष 2015 में नेट-जेआरएफ करने के बाद भी शिक्षक भर्ती की परीक्षा दी थी लेकिन रिटेन क्वालीफाई नहीं हो पाया था। इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी और प्रयास जारी रहा। हमेशा पिता रामकैलाश यादव और मां शीला देवी ने हौसला बढ़ाया।

बताया कि उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए वर्ष 2016 में विज्ञापन आया था। आवेदन के बाद पांच जनवरी 2019 को परीक्षा हुई। इसके बाद 27 नवंबर को साक्षात्कार और 14 जनवरी को परिणाम की जानकारी हुई तो बहुत खुशी हुई। सफलता का श्रेय माता-पिता और साथी शैलेंद्र सिंह को देते हुए विनोद ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोड में प्रवक्ता पद पर लिखित परीक्षा का परिणाम भी आ चुका है।

भाईयों को भी दे रहे शिक्षा का दान

विनोद यादव अपने साथ-साथ दो भाइयों की पढ़ाई का भी बीड़ा उठाए हैं। छोटे भाई संजय यादव और मझले भाई विवेक यादव भी पूरी तन्मयता के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। बताया कि परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, इसलिए अपने साथ-साथ दोनों भाइयों को कभी इसकी कमी नहीं महसूस होने दिया।

 

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