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बनारस में सपा नेता को कांग्रेस ने दिया टिकट, हैरत में प्रत्याशी

Sat, 04 Feb 2017 08:42 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला वाराणसी
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abdul samad ansari with cm - फोटो : अमर उजाला
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सपा के पूर्व विधायक एवं शहर उत्तरी सीट से प्रबल दावेदार अब्दुल समद अंसारी को सियासी समीकरण साधने के लिए कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस की ओर से शनिवार को जारी नौ प्रत्याशियों की सूची में समद को शहर उत्तरी सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया है।
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सपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रणनीति के तहत सपा नेता को कांग्रेस कोटे से टिकट दिलवाया गया है। दरअसल कांग्रेस और सपा गठबंधन में कांग्रेस उत्तरी सीट अपने लिए मांग रही थी। समद को कांग्रेस से टिकट दिलवाकर अखिलेश यादव ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं।
अब्दुल समद अंसारी 2007 में सपा के टिकट पर शहर उत्तरी से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। 2012 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
इस बार सबसे पहले सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। बाद में उनका टिकट काटकर ओपी सिंह को दे दिया गया।
सपा और कांग्रेस गठबंधन के बाद से इस सीट से किसी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई थी। सूत्रों की मानें तो समद ने करीब पांच दिन पूर्व लखनऊ में अखिलेश से मुलाकात की थी। अखिलेश ने उन्हें क्षेत्र में चुनाव प्रचार शुरू करने को कहा था। हालांकि इसका अंदाजा किसी को नहीं था कि समद को कांग्रेस से प्रत्याशी बनाया जाएगा।
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शनिवार को समद का नाम कांग्रेस की सूची में आने से सपा और कांग्रेस नेताओं में खलबली मच गई। उत्तरी सीट से कांग्रेस की राबिया कलाम और जफरुल्लाह जफर प्रबल दावेदार थे। सपा जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव का कहना है कि दोनों दलों की सहमति से समद को प्रत्याशी बनाया गया है। 
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सुरेंद्र पटेल के करीबी माने जाते हैं अब्दुल समद

congress list - फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के मुताबिक इसके बाद ही शहर उत्तरी सीट से पूर्व विधायक अब्दुल समद अंसारी उम्मीदवार घोषित किया गया है। समद को पूर्व में भी उन्हें प्रत्याशी बनाया गया था लेकिन बाद में शिवपाल यादव ने उनका टिकट काटकर ओपी सिंह को प्रत्याशी बना दिया था।

समद 2007 के विधानसभा चुनाव में जीते थे लेकिन 2012 के चुनाव में सपा की लहर के बाद भी चुनाव हार गए थे। अब्दुल समद को लोक निर्माण राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल का करीबी बताया जाता है।

जबकि, ओपी सिंह को पार्टी के प्रदेश महासचिव ओमप्रकाश सिंह की पैरवी पर टिकट मिला था। हालांकि ओपी सिंह खुद को टीम अखिलेश का सदस्य बताते हैं। 
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