श्री काशी विश्वनाथ धाम के शंकराचार्य चौक में नवरात्रि महोत्सव की छठी संध्या पर डॉ. शिवानी शुक्ला ने गायन की प्रस्तुति दी। उन्होंने देवी स्तुति ‘अंबे अंबिके जगदंबिके’ से कार्यक्रम की शुरुआत की और इसके बाद शिवमहिमा पर आधारित रचना ‘बतावा मितवा कहां नाही हौ भोला’ प्रस्तुत की।
श्री काशी विश्वनाथ धाम के शंकराचार्य चौक में नवरात्रि महोत्सव की छठी संध्या पर शुक्रवार को संगीत कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति डॉ. शिवानी शुक्ला के गायन की रही। उन्होंने देवी स्तुति ‘अंबे अंबिके जगदंबिके’ से गायन की शुरुआत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद गुरु प्रभाव रंग जी द्वारा रचित शिवमहिमा पर आधारित रचना ‘बतावा मितवा कहां नाही हौ भोला’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर किया।
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डॉ. शिवानी शुक्ला के गायन में तबले पर श्री अंकित कुमार सिंह ने संगति की। संवादिनी पर श्री आनंद किशोर मिश्र ने साथ दिया, जबकि साइड रिदम पर श्री संजय श्रीवास्तव ने संगत की।
देवी स्तुति से शुरू हुआ गायन
डॉ. शिवानी शुक्ला ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत देवी स्तुति से की। ‘अंबे अंबिके जगदंबिके’ की प्रस्तुति ने नवरात्रि महोत्सव के वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। इसके बाद उन्होंने शिवमहिमा पर आधारित रचना प्रस्तुत की।
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गुरु प्रभाव रंग जी की रचना ‘बतावा मितवा कहां नाही हौ भोला’ के माध्यम से भगवान शिव की महिमा का भावपूर्ण गायन किया गया। प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।