उन्होंने बताया कि अभियान के माध्यम से केंद्र सरकार से गोहत्या निषेध के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाने की मांग की जाएगी। साथ ही गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने, गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना, केंद्रीय गो-चारा नीति लागू करने सहित कुल 36 मांगों को पूरा करने का आग्रह किया जाएगा।
जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज ने कहा कि इन मांगों के समर्थन में देशभर में जनजागरण और हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है। अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में गो-संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा और सरकार तक जनभावनाएं पहुंचाई जाएंगी।
उन्होंने बताया कि काशी में यात्रा के दौरान गोमाता के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प भी दिलाया जाएगा। जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र और ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि अभियान का अगला चरण अक्टूबर माह में आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर में व्यापक स्तर पर जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
15 करोड़ हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपे जाएंगे
अभियान के प्रथम चरण में 27 अप्रैल को देशभर की 5000 तहसीलों में पांच करोड़ से अधिक लोगों ने गोमाता के संरक्षण के समर्थन में हस्ताक्षर कर केंद्र और प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा था। बालक देवाचार्य ने बताया कि प्रथम चरण के दौरान उठाई गई मांगों पर अब तक सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया, इसलिए अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है। इसके तहत देश के सभी जिलों में जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इस बार अभियान के माध्यम से 15 करोड़ से अधिक हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र सरकारों को भेजे जाएंगे। वाराणसी में पांच लाख हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपे जाएंगे।