वाराणसी में कैंट से गोदौलिया के बीच चार किमी रोपवे कॉरिडोर को नो काइट फ्लाइंग जोन बनाया जाएगा। इसके लिए खाका तैयार किया जा रहा है। रोपवे का संचालन शुरू होने के बाद पतंग उड़ाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में पतंग उड़ाने वालों को नोटिस देकर पुलिस उन पर प्रतिबंध लगाएगी। इस पर अंकुश लगाने के लिए ड्रोन की भी मदद ली जाएगी।
रोपवे के तारों पर अक्सर पतंगें फंसी दिखाई देती हैं, जिन्हें हटाने में रोपवे के सुरक्षा इंजीनियरों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। दरअसल, इस दायरे में पतंग उड़ने से रोपवे संचालन के समय दिक्कतें आएंगी। इसके लिए रोपवे ने आठ-आठ मीटर का कॉरिडोर बनाया है। कॉरिडोर के दायरे में पतंग नहीं उड़ाई जाएगी।
पतंग के साथ इस्तेमाल होने वाला मजबूत मांझा भी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर सकता है। पतंग फंसने पर उड़ाने वाले उसे छुड़ाने के चक्कर में डोर को तेजी से खींचते हैं, जिससे तारों में कंपन की स्थिति पैदा हो सकती है।
इन सभी पहलुओं को देखते हुए नो काइट फ्लाइंग जोन बनाया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों की ओर से नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से अनुमति ली जाएगी। इस काम में वीडीए को लगाया गया है। जिस प्रकार बाबतपुर एयरपोर्ट के आसपास निगरानी की जाती है, उसी प्रकार रोपवे कॉरिडोर के चार किमी दायरे की निगरानी की जाएगी।