UP Election 2017: 302 millionaires are contesting in the first phase
पांच साल से ही इस बार के चुनाव का इंतजार कर रहे कई दावेदारों को प्रत्याशियों की सूची आने के बाद करारा झटका लगा है। लेकिन करें भी तो क्या... जब चिड़िया चुग गई खेत...? जिले की सियासी फिजा में असंतोष की हवा भी घुल गई है।
हर पार्टी में कुछ लोग मुंह फुलाए बैठे हैं। आखिर इतने सालों से अरमान सजा रखे थे कि अबकी तो ‘माननीय’ का तमगा लेकर रहेंगे। पर... हाथ लगी घोर निराशा। भाजपा, सपा और कांग्रेस में ऐसे लोगों की तादाद ज्यादा है।
प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी खूब जोर लगा लिया लेकिन कामयाबी हाथ न लगी। अब थक-हार कर यही सोच रहे हैं कि ‘न खेलब न खेले देब, खेलवै बिगाड़ देब...।’ प्रमुख दलों के भीतर से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक अब इन कार्यकर्ताओं-नेताओं ने तय किया है कि आपसी कड़वाहट भुलाकर, दलों के बंधन तोड़कर एक मजबूत प्रत्याशी खड़ा किया जाए।
ऐसे प्रत्याशी उन सीटों पर खड़े किए जाएं जहां से दावेदारों को झुनझुना थमा दिया गया। उन्हें लगता है कि पार्टी के आलाकमान तक उनकी बात पहुंचाई नहीं जा रही, उधर हाईकमान इस तैयारी में है कि बागी सुर निकालने वाले लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।