27 नवंबर 2024 को पीड़िता अपनी नाबालिग बेटी आराध्या के साथ अस्पताल से घर आई थी। अस्पताल में मरीज के भाई, बहन और भांजा मौजूद थे। पीड़िता का आरोप है कि पति के अचेत होने और उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए परिजनों ने ओरियाना अस्पताल के कर्मचारियों को अपनी साजिश में शामिल किया। पति पढ़े-लिखे थे और हमेशा हस्ताक्षर करते थे, कभी अंगूठा नहीं लगाते थे। इसके बावजूद आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर मरीज का फर्जी अंगूठा लगवाया और उनकी करोड़ों की संपत्ति का फर्जी बैनामा पंजीकृत करा लिया।
2 दिसंबर 2024 को दिल्ली के आकाश अस्पताल में इलाज के दौरान अरुण सिंह यादव की मौत हो गई। अंतिम संस्कार के बाद जब पीड़िता 27 मार्च 2025 को अपने घर पर थी, तब आरोपी दबंगई से घर में घुस आए, उनके साथ मारपीट की और धमकी दी कि जमीन का बैनामा उनके नाम हो चुका है, इसलिए वे घर खाली कर दें। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज संदीप सिंह को विवेचना सौंपी गई है।