आरोप के अनुसार उसी रात गंगापुर रजिस्ट्री कार्यालय के तत्कालीन उपनिबंधक अनिल कुमार और एक लिपिक की मिलीभगत से रात 11:31 बजे से 11:35 बजे के बीच संपत्ति की रजिस्ट्री कर दी गई। अधिवक्ता का दावा है कि डिजिटल फोटो पंजीकरण का समय भी इस क्रम की पुष्टि करता है, जबकि शाम 5 बजे के बाद रजिस्ट्री कार्यालय का सर्वर सामान्यतः बंद हो जाता है।
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विवेचक ने विशाल मिश्रा, रवि उपाध्याय, दरेखू निवासी वरुणापति उपाध्याय, घौसाबाद निवासी नितेश राय, लंका के छित्तूपुर निवासी सुरेश कुमार सिंह, दरेखू निवासी अजय कुमार तिवारी, प्रवीण कुमार सिंह, नरऊर निवासी प्रशांत सिंह, तत्कालीन उपनिबंधक अनिल कुमार तथा निबंधक लिपिक सत्यांशु सिंह से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल सबसे पहले अभिलेखों और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।