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Varanasi News: आठ महीने की पावर ऑफ अटॉर्नी एक दिन में निरस्त, 50 करोड़ की जमीन हड़पने के मामले की जांच शुरू

Thu, 16 Jul 2026 07:44 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

बहू के नाम आठ महीने पुरानी पावर ऑफ अटॉर्नी को एक दिन में निरस्त कराया गया। इसके बाद भतीजे के नाम दानपत्र कराया गया और इसके करीब सात घंटे बाद ही उसी जमीन को बेच दिया गया। इस मामले में रोहनिया थाने के विवेचक ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। 
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Document - फोटो : Istock
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विस्तार
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वाराणसी कमिश्नरेट के रोहनिया थाना क्षेत्र के मोहनसराय में सेवानिवृत्त शिक्षक ओमप्रकाश मिश्रा की करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को कथित तौर पर धोखे से दानपत्र और फिर बिक्री विलेख (रजिस्ट्री) के जरिए हड़पने के मामले की जांच रोहनिया थाने के विवेचक ने शुरू कर दी है। ओमप्रकाश के अधिवक्ता ने बताया कि आरोपियों ने पीड़ित की बहू के नाम आठ महीने पुरानी पावर ऑफ अटॉर्नी को एक ही दिन में निरस्त कराया। इसके बाद शाम को भतीजे विशाल मिश्रा के नाम दानपत्र कराया गया और करीब सात घंटे बाद उसी जमीन की रजिस्ट्री भी करा दी गई।

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उन्होंने कहा कि सामान्य परिवार की 50 करोड़ रुपये की जमीन का दानपत्र होने के कुछ ही घंटों के भीतर उसकी बिक्री हो जाना कई सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण चार महीने तक पीड़ित की थाने में सुनवाई नहीं हुई। 

पीड़ित ओमप्रकाश मिश्रा के बेटे अभिषेक मिश्रा चिकित्सक हैं और मुरादाबाद में तैनात हैं। व्यस्तता के कारण उन्होंने करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की 70 बिस्वा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी अपनी पत्नी के नाम कर दी थी, ताकि वह संपत्ति की देखभाल कर सकें। इस बीच 30 मार्च को ओमप्रकाश का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ।
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इसके बाद किडनी की बीमारी के चलते भतीजे विशाल मिश्रा, घरेलू ड्राइवर रवि उपाध्याय और पूर्व परिचित वरुणापति उपाध्याय उन्हें डायलिसिस के लिए ले जाने लगे। आरोप है कि 7 अप्रैल को डायलिसिस और आयुष्मान कार्ड बनवाने के बहाने उन्हें अर्धबेहोशी की अवस्था में गंगापुर रजिस्ट्री कार्यालय ले जाया गया। शाम 4:38 बजे से 4:41 बजे के बीच विशाल मिश्रा ने जमीन का दानपत्र अपने नाम करा लिया। 

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आरोप के अनुसार उसी रात गंगापुर रजिस्ट्री कार्यालय के तत्कालीन उपनिबंधक अनिल कुमार और एक लिपिक की मिलीभगत से रात 11:31 बजे से 11:35 बजे के बीच संपत्ति की रजिस्ट्री कर दी गई। अधिवक्ता का दावा है कि डिजिटल फोटो पंजीकरण का समय भी इस क्रम की पुष्टि करता है, जबकि शाम 5 बजे के बाद रजिस्ट्री कार्यालय का सर्वर सामान्यतः बंद हो जाता है।

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विवेचक ने विशाल मिश्रा, रवि उपाध्याय, दरेखू निवासी वरुणापति उपाध्याय, घौसाबाद निवासी नितेश राय, लंका के छित्तूपुर निवासी सुरेश कुमार सिंह, दरेखू निवासी अजय कुमार तिवारी, प्रवीण कुमार सिंह, नरऊर निवासी प्रशांत सिंह, तत्कालीन उपनिबंधक अनिल कुमार तथा निबंधक लिपिक सत्यांशु सिंह से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल सबसे पहले अभिलेखों और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।
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