विभाग का मानना है कि इलेक्ट्रिक नावों के संचालन से गंगा में प्रदूषण कम होगा, ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आएगी और पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता घटेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों को देखते हुए भी जल परिवहन के विद्युतीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
हालांकि, डीजल और सीएनजी से चल रही नावों को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलना नाव संचालकों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में विभाग इस बदलाव के दौरान नाव मालिकों को किस प्रकार आर्थिक सहायता या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराएगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद योजना के क्रियान्वयन और सहायता संबंधी दिशा-निर्देश भी तय किए जाएंगे।