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Varanasi News: फरवरी 2026 में ही आया था मांस की दुकानें शहर से बाहर करने का प्रस्ताव, कांग्रेस से मतलब नहीं

Sat, 13 Jun 2026 06:06 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News:  वाराणसी में मांस-मछली की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव फरवरी 2026 में नगर निगम सदन की बैठक में लाया गया था। यह प्रस्ताव भाजपा पार्षदों की ओर से प्रस्तुत किया गया था, जिसका कांग्रेस से कोई संबंध नहीं था। प्रस्ताव पर हुई कार्रवाई की पुष्टि अप्रैल 2026 की बैठक में कार्यवृत्ति अनुमोदन के दौरान की गई थी।
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नगर निगम वाराणसी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शहर से मांस-मछली की दुकानें बाहर करने का प्रस्ताव भाजपा पार्षदों ने ही दिया था। इसकी पुष्टि उपसभापति ने कर दी है। साफ किया है कि इस फैसले से कांग्रेस पार्षद गुलाम अली का कोई लेना देना नहीं है। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, मांस कारोबारियों को शिफ्ट करने का प्रस्ताव 2 फरवरी 2026 है। इसके प्रस्तावक नगर निगम कार्यकारिणी समिति के सदस्य और भाजपा पार्षद मदन मोहन तिवारी हैं। 

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प्रस्ताव का समर्थन भाजपा पार्षद माधुरी सिंह ने किया था। उन्होंने कहा था कि नगर निगम सीमा के तहत चारों दिशाओं रामनगर, सूजाबाद, चितईपुर, सारनाथ, ऐढ़े और बड़ालालपुर के बीच जगह चिह्नित कर व्यवस्थित मांस और मछली का बाजार विकसित किया। सभापति की ओर से स्पष्ट आदेश दिया गया था कि प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है। इससे जुड़ी कार्य वृत्ति की पुष्टि 13 अप्रैल 2026 को आधिकारिक रूप से हो चुकी है।

पहली बार 2024 में भाजपा पार्षद इंद्रेश के प्रस्ताव को मिली थी मंजूरी
जनवरी 2024 में आदि विश्वेश्वर वार्ड के भाजपा पार्षद इंद्रेश सिंह ने प्रस्ताव दिया था कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दो किलोमीटर के दायरे में मांस और मछली न बेची जाए जिसे नगर निगम सदन ने मंजूरी दी थी। इसके बाद 3 महीने तक अभियान चलाकर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले मार्ग की 93 दुकानें बंद कराई गई थीं।

साथ ही हरा पर्दा लगाकर मांस, मछली बेचने पर सख्ती की गई थी। सावन और नवरात्रि में मांस-मछली की दुकानों को बंद करने का आदेश दिया गया था लेकिन दुकानों को बाहर किए जाने का आदेश नहीं पारित हुआ था। इस पर 2026 में मुहर लगी है।

6 जून को ये हुआ था निर्णय: काशी में मांस कारोबार पर छह जून को टाउनहाॅल में हुई सदन की बैठक में निर्णय लिया गया था। कहा गया था कि रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर, शिवपुर में जमीन चयनित की गई है।

इसलिए हुआ विवाद, कांग्रेस ने विरोध दर्ज कराया
नगर निगम की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कांग्रेस पार्षद दल के नेता गुलशन अली का नाम बताया गया। कहा गया था कि यह मामला कांग्रेस पार्षद गुलशन अली ने उठाया था। इस पर कांग्रेस हमलावर हो गई थी। कांग्रेस पार्षद दल ने मामले में मेयर अशोक कुमार तिवारी से मुलाकात भी की थी। इसके बाद गिले-शिकवे दूर हुए थे।

पार्षद मदन मोहन तिवारी के प्रस्ताव पर फैसला लिया गया। मांस कारोबारियों को उजाड़ा नहीं जा रहा। सबको सुव्यवस्थित तरीके से बसाया जा रहा है। - अशोक कुमार तिवाारी, मेयर

गुलशन अली कार्यकारिणी के सदस्य नहीं हैं तो उनका प्रस्ताव कहां से आ गया। भाजपा कांग्रेस के प्रस्ताव पर निर्णय क्यों लेगी। - नरसिंह बाबा, उपसभापति, नगर निगम
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मांस की दुकानें शिफ्ट करने का प्रस्ताव भाजपा पार्षद राजेश पटेल, अशोक मौर्या और मदन मोहन तिवारी ने दिया था। हमने सदन की बैठक में सिर्फ इतना कहा था कि आने वाले सावन में फिर मांस कारोबारियों की दुकानें बंद हो जाएंगी। ये गरीब लोग हैं। इनकी रोजी- रोटी पर असर न पड़े, इन्हें बंद न किया जाए। इसके बावजूद नगर निगम ने प्रेस रिलीज जारी कर मुझे ही प्रस्तावक बता दिया। बदनाम कर दिया। बाद में मेयर ने स्थिति स्पष्ट की है। - गुलशन अली, नेता, कांग्रेस पार्षद दल
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