पहली बार 2024 में भाजपा पार्षद इंद्रेश के प्रस्ताव को मिली थी मंजूरी
जनवरी 2024 में आदि विश्वेश्वर वार्ड के भाजपा पार्षद इंद्रेश सिंह ने प्रस्ताव दिया था कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दो किलोमीटर के दायरे में मांस और मछली न बेची जाए जिसे नगर निगम सदन ने मंजूरी दी थी। इसके बाद 3 महीने तक अभियान चलाकर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले मार्ग की 93 दुकानें बंद कराई गई थीं।
साथ ही हरा पर्दा लगाकर मांस, मछली बेचने पर सख्ती की गई थी। सावन और नवरात्रि में मांस-मछली की दुकानों को बंद करने का आदेश दिया गया था लेकिन दुकानों को बाहर किए जाने का आदेश नहीं पारित हुआ था। इस पर 2026 में मुहर लगी है।
6 जून को ये हुआ था निर्णय: काशी में मांस कारोबार पर छह जून को टाउनहाॅल में हुई सदन की बैठक में निर्णय लिया गया था। कहा गया था कि रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर, शिवपुर में जमीन चयनित की गई है।
इसलिए हुआ विवाद, कांग्रेस ने विरोध दर्ज कराया
नगर निगम की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कांग्रेस पार्षद दल के नेता गुलशन अली का नाम बताया गया। कहा गया था कि यह मामला कांग्रेस पार्षद गुलशन अली ने उठाया था। इस पर कांग्रेस हमलावर हो गई थी। कांग्रेस पार्षद दल ने मामले में मेयर अशोक कुमार तिवारी से मुलाकात भी की थी। इसके बाद गिले-शिकवे दूर हुए थे।
पार्षद मदन मोहन तिवारी के प्रस्ताव पर फैसला लिया गया। मांस कारोबारियों को उजाड़ा नहीं जा रहा। सबको सुव्यवस्थित तरीके से बसाया जा रहा है। - अशोक कुमार तिवाारी, मेयर
गुलशन अली कार्यकारिणी के सदस्य नहीं हैं तो उनका प्रस्ताव कहां से आ गया। भाजपा कांग्रेस के प्रस्ताव पर निर्णय क्यों लेगी। - नरसिंह बाबा, उपसभापति, नगर निगम
मांस की दुकानें शिफ्ट करने का प्रस्ताव भाजपा पार्षद राजेश पटेल, अशोक मौर्या और मदन मोहन तिवारी ने दिया था। हमने सदन की बैठक में सिर्फ इतना कहा था कि आने वाले सावन में फिर मांस कारोबारियों की दुकानें बंद हो जाएंगी। ये गरीब लोग हैं। इनकी रोजी- रोटी पर असर न पड़े, इन्हें बंद न किया जाए। इसके बावजूद नगर निगम ने प्रेस रिलीज जारी कर मुझे ही प्रस्तावक बता दिया। बदनाम कर दिया। बाद में मेयर ने स्थिति स्पष्ट की है। - गुलशन अली, नेता, कांग्रेस पार्षद दल