उपभोक्ता गिनाने लगे समस्या तो सकते में आ गए अधिकारी
विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के सामने सभागार में मौजूद उपभोक्ताओं (उद्यमी, बुनकर, आम उपभोक्ता) ने एक-एक कर समस्याएं गिनाईं। रामनगर के जगदीश झुनझुनवाला ने कहा कि बिजली निगम की लापरवाही का आलम यह है कि अपनी यूनिट बंद कर गुजरात में नई यूनिट स्थापित करने की तैयारी है। गोविंद ने स्मार्ट मीटर के सही न चलने की बात कही। बुनकरों ने कहा कि अप्रैल 2006 से पावरलूम को फिक्स रेट पर बिजली देने का निर्णय हुआ लेकिन तभी से बिजली का बिल लिया जा रहा है।
बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33122 करोड़ बाकी
राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि किसी भी कीमत पर न तो बिजली निगम का निजीकरण होना चाहिए और न ही बिजली दर में बढ़ोतरी मान्य होगी। अगर सही से मूल्यांकन किया जाए तो पूरे प्रदेश में उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 33122 करोड़ बकाया निकलेगा। इसको देखते हुए बिजली दर में 45 प्रतिशत बढ़ोतरी की जगह 45 प्रतिशत की कमी करनी चाहिए। निगम का निजीकरण किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्राइवेट सेक्टर से महंगी बिजली खरीदी जाती है उसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है।
उद्यमी बोले-फिक्स चार्ज नहीं लगाना चाहिए
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के बैनर तले उद्यमियों ने भी अपनी समस्या बताई। आरके चौधरी ने बताया कि प्रदेश में 14700 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। प्रदेश के समग्र विकास एवं औद्योगिक निवेश के लिए विद्युत दरें जो निर्धारित हैं, वो अन्य प्रदेशों से अधिक हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी करने की अपेक्षा लाइन लॉस को कम करना होगा। प्रदेश में सरप्लस बिजली एवं बिजली के संसाधन हैं। ऐसे में फिक्स्ड चार्ज का कोई औचित्य नहीं है। इस दौरान राजेश भाटिया, अनुपम देवा, पंकज अग्रवाल, नीरज पारीख मौजूद रहे।
आयोग के अध्यक्ष बोले, निगम का परफार्मेंस खराब
विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने सभी की बातों को सुनने के बाद माना कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का परफार्मेंस बहुत खराब है। मुख्य रूप से टेक्निकल लाॅस पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सब कुछ होने के बाद भी ट्रांसफाॅर्मर जल रहे हैं, तार जल रहे हैं, यह ठीक नहीं है। ऐसा लगता है कि अधिकारी निगरानी नहीं करते हैं। यह बहुत चिंतनीय है।