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एक साल से मां की लाश के साथ: 20 हजार में बेचे मां के आभूषण, मंगाया राशन, बोलीं- इसलिए नहीं कराया अंतिम संस्कार

Thu, 30 Nov 2023 08:53 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

वाराणसी से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां दो बेटियां एक साल से मां के शव के साथ रह रहीं थीं। शव में पड़े कीड़े निकालकर बाहर फेंक देती थीं। दोनों मौसा-मौसी के आने पर दरवाजा नहीं खोलती थीं। अब पुलिस ने तीन ताले तोड़कर कंकाल निकाला है। लंका थाना इलाके के मदरवां की यह घटना है।
 
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एक साल से मां की लाश के साथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र के मदरवां में बुधवार की शाम घर के अंदर से एक महिला का कंकाल बरामद हुआ है। महिला का निधन 8 दिसंबर 2022 को बीमारी की वजह हुआ था, लेकिन दोनों बेटियों ने अंतिम संस्कार ही नहीं किया। महिला के शव को रजाई के अंदर छिपाकर रखा था। 
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शव में कीड़े पड़े तो हाथ से निकालकर बाहर फेंक दिया। दुर्गंध उठने पर घर की छत पर जाकर खाना खाया। करीब एक साल तक महिला के शव के साथ रहीं। मामले की सूचना पर बुधवार को लंका थाने की पुलिस मौके पहुंची और घर के तीन दरवाजों के ताले तोड़कर अंदर गई। 

कंकाल को बाहर कराया और दोनों बेटियों को भी घर से बाहर ले आई। साक्ष्य के तौर पर महिला के कपड़े, चप्पल, चादर, रजाई आदि कब्जे में लिए गए हैं। पुलिस के मुताबिक दोनों बेटियों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।
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बलिया के उभांव थाना क्षेत्र के होलपुर रचौली गांव निवासी रामकृष्ण पांडेय की तीन बेटियों में सबसे बड़ी ऊषा तिवारी (52 वर्ष) थी। उसकी शादी बेल्थरारोड के अखौख गांव में देवेश्वर त्रिपाठी से हुई थी। शादी के दस साल बाद पति से विवाद हुआ और ऊषा अपनी दो बेटियों के साथ पिता रामकृष्ण पांडेय के साथ मायके में रहने लगी थी। 
 

बेटी बोली- पैसे नहीं थे, इसलिए नहीं किया अंतिम संस्कार
थानाध्यक्ष के मुताबिक, दोनों बेटियों ने बताया कि मां की मौत आठ दिसंबर 2022 को बीमारी के चलते हो गई थी। मां उल्टी करती थीं। पैसे और साधन के अभाव में शव का अंतिम संस्कार नहीं करा सके। बड़ी बेटी पल्लवी की उम्र 27 साल है। छोटी बेटी वैष्णवी 18 साल की है। पल्लवी मास्टर की डिग्री ले चुकी है, जबकि वैष्णवी हाईस्कूल की छात्रा है। दोनों बेटियों की मनोदशा ठीक नहीं है। फिलहाल दोनों को मिर्जापुर निवासी मौसी और मौसा के संरक्षण में दिया गया है। मौसा धर्मेंद्र की तहरीर पर ऊषा के कंकाल का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

20 हजार में बेचे मां के आभूषण, फिर मंगाया राशन
बेटियों ने पुलिस को बताया कि आठ दिसंबर को मां के निधन के बाद उन्होंने चार-पांच महीने तक घर में रखे सामान से जीवन यापन किया। जब राशन खत्म हो गया तो मां के आभूषण 20 हजार में बेच दिए। इसके बाद राशन मंगाया। कुछ नकदी भी घर में थी, उससे खर्च चलता रहा। आसपास के लोग पूछते थे तो उन्हें यही कहती थीं कि मां की तबीयत ठीक नहीं है, वो सो रही हैं। पड़ोसियों से बहुत कोई वास्ता नहीं था, इसलिए किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। बेटियां पिता के संपर्क में बीते छह साल से नहीं थीं।

दस लाख का ऋण दिलाने का लगाती थीं गुहार
पड़ोसियों ने बताया कि वैसे तो दोनों बेटियां घर से बाहर कम ही निकलती थीं। जब कोई दिख जाए तो उससे कॉस्मेटिक की दुकान फिर से शुरू करने के लिए दस लाख रुपये ऋण दिलाने की गुहार लगाती थीं। दोनों की बातों पर कोई बहुत गौर भी नहीं करता था।

दो दशक पहले पति को छोड़ मायके आ गई थी उषा त्रिपाठी
उभांव थाना क्षेत्र के अखोप ग्राम निवासी देवेश्वर त्रिपाठी की पत्नी उषा त्रिपाठी दो दशक से अपने पति को छोड़ मायके में रह रही थीं। उषा त्रिपाठी के जेठ ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने बताया कि कई बार ससुराल में मांगलिक आयोजनों के दौरान निमंत्रण दिया गया। यहां तक कि पति देवेश्वर भी उसे बुलाने गए, लेकिन उन्हें भगा दिया गया। इसके चलते देवेश्वर मानसिक रोग के शिकार हो गए और उनका इलाज अभी भी चल रहा है। पिता स्व. व्यास तिवारी रेलवे के रिटायर्ड गार्ड थे।

शव के साथ रहने की 29 दिन में दूसरी घटना, पांच साल में चौथी
वहीं, लंका के मदरवां में मां के शव के साथ एक साल से रहने वाली बेटियों की घटना ने चौक के पठानी टोला की याद ताजा कर दी। अभी 29 दिन पूर्व 25 अक्तूबर को ही चौक थाना क्षेत्र के पठानी टोला में पिता किशोर वाही के शव के साथ बेटे सुमित वाही के रहने का मामला सामने आया था। पांच दिन तक वह पिता के शव के साथ ही रह रहा था।

दुर्गंध से परेशान लोगों ने पुलिस से संपर्क साधा तो घटना उजागर हुई थी। किशोर वाही की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। इसके पूर्व 11 नवंबर 2018 में दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के मुंशी घाट के एक मकान में तरुण कांति (63) के शव के साथ दस दिनों से पत्नी सुचित्रा और साली सुनंदा रह रही थीं। दोनों बहनों की उस समय मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। जिससे वह पुलिस को कोई जानकारी नहीं दे सकीं थीं।
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पेंशन की वजह से मां के शव के साथ रहते थे बेटे और बेटियां
भेलूपुर थाना क्षेत्र के दुर्गाकुंड कबीर नगर कॉलोनी में 23 मई 2018 को पुलिस ने 70 वर्षीय अमरावती का शव घर से बरामद किया था। 13 हजार रुपये पेंशन की लालच में बेटे और बेटियां पांच महीने से घर पर विशिष्ट किस्म के केमिकल लगाकर अमरावती के शव को रखे हुए थे। बिजली कनेक्शन कटने के बाद शव से बदबू उठने पर जब पड़ोसियों ने शिकायत दर्ज कराई तब मामला उजागर हुआ।
 
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