वाराणसी। कोरोना से हुए लॉकडाउन में दूध उत्पादक खस्ताहाल हो गए थे। अब धीरे-धीरे उनकी स्थिति बेहतर हो रही है। केवल तीन दिन मिठाई की दुकानों के खुलने की वजह से अभी मांग पहले की तुलना बहुत कम है। कारोबारियों के अनुसार लॉकडाउन के दौरान उनको बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। होटल-रेस्तरां कम खुलने, शादियां कम होने, कम खर्चे में शादी होने से दुग्ध उत्पादकों की हालत अभी बेहतर नहीं हुई है। नुकसान की आशंका को देखते हुए दूध से बने उत्पाद कम बनाए जा रहे हैं।
इस सीजन में लगन शुरू होते ही दूध का दाम आसमान पर पहुंच जाता था। इस समय 60 से 70 रुपये प्रति लीटर तक दूध बिक रहा है, जबकि शादियों के समय 100 रुपये तक दूध बिकता था। बाजार में मांग कम होने के कारण अधिकतर दुग्ध उत्पादक स्थानीय बाजार में ही दूध खपा रहे हैं। कुछ लोग दूध का उत्पाद बनाकर उसे खपाने में लगे हैं। कुछ डेयरी वालों को ही सस्ते रेट पर बेच रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि पहले से बाजार बेहतर हुआ है। हम लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और बेहतर बाजार हो जाएगा। इस समय हम लोग दूध बेचने पर ही ज्यादा फोकस कर रहे हैं। दूध से बने उत्पादों को बेचने पर दिक्कत होती है। केवल आर्डर पर ही दूध से बने उत्पाद बन रहे हैं।
पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन करके घर गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया है। पशुओं के ऊपर लागत खर्च के बाद दूध की कीमत कम मिलना घाटे का सौदा हो रहा था। अब जब से लॉकडाउन खुला है तब से हालत बेहतर हुई है। इस समय दूध के अच्छे दाम मिल रहे हैं।