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बनारस आईईडी ब्लास्टः 10 बिस्वा जमीन के लिए दो महीने पहले चिथड़े उड़ा देने की दी थी धमकी

Mon, 03 Sep 2018 08:18 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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बनारस आईईडी ब्लास्टः - फोटो : amar ujala
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वाराणसी के मिल्कोपुर गांव में आईईडी से दो धमाके कर सोये हुए व्यापारी पिता पुत्र की हत्या कर दी गई। जमीन विवाद में नक्सली तौर तरीके से की गई इन हत्याओं से पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया।  खली-चूनी व्यापारी लालजी यादव को मिल्कोपुर स्थित उनके मकान के पीछे की लगभग 10 बिस्वा जमीन छोड़ने के लिए दो माह पहले धमकाया गया था।
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जमीन के बदले उन्हें समझौते के नाम पर दो लाख रुपये जबरन थमाने की कोशिश भी की गई थी। बात न मानने पर लालजी और पूरे परिवार के चिथड़े उड़ा देने की धमकी भी दी गई थी। लालजी जमीन की बाउंड्री करा रहे थे तो यह विरोधियों को खटक रहा था और विवाद बढ़ता चला गया था।

लालजी के भाई श्यामजी ने इसी आधार पर छह आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया है। श्यामजी ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि चौक क्षेेत्र निवासी प्रतीक वर्मा और उसके परिवार की जमीन की देखरेख मुन्नीलाल यादव करता था। दो माह से वर्मा परिवार और मुन्नीलाल यादव व उसका बेटा जमीन विवाद में सुलह करने के लिए दबाव बना रहे थे।
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बात न मानने पर दो बदमाशों को बुलाकर भी लालजी को धमकाया गया था। इसी मामले में लालजी से दो सप्ताह पहले कहासुनी और मारपीट भी की गई थी। हालांकि, मामला चौबेपुर थाने पर दर्ज नहीं हुआ था। इससे पहले भी कई बार लालजी को विवादित जमीन से दूर हो जाने की बात कही गई थी।
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32 वर्ष पुराने विस्फोट की याद हुई ताजा

घटनास्थल का पुलिस के उच्चाधिकारियों ने लिया जायजा - फोटो : amar ujala
वाराणसी के मिल्कोपुर गांव में जहां लालजी यादव और उसके बेटे अजय की हत्या की गई है, उससे कुछ ही दूरी पर पटाखा बनाने की फैक्ट्री में तीन दशक पहले बम बनाये जाते थे। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि बम बनाने के दौरान 1986 में जबरदस्त विस्फोट हुआ था और पूरी फैक्ट्री उड़ गई थी।

इस दौरान कई लोगों की मौत हुई थी और कई लोग अपंग हो गए थे। इस वारदात के बाद मिल्कोपुर, महासीपुर, पचरांव, गौराकलां, तोफापुर और शंकरपुर सहित आसपास के कई गांवों में कई दिनों तक चूल्हे नहीं जले थे। मिल्कोपुर के राजू चौहान ने कहा कि लालजी यादव और उनके बेटे की हत्या ने 32 साल पुरानी घटना की याद ताजा कर दी।

ऐसी घटना नक्सल प्रभावित इलाकों में ही देखी और सुनी जाती थी। इस घटना से ग्रामीणों में भय व्याप्त हो गया है। पचरांव के दिनेश मिश्र ने कहा कि बाप-बेटे की हत्या से दिल दहल गया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आरोपियों के संबंध नक्सलियों से हैं। दोषियों को कड़ी सजा मिले और ऐसी व्यवस्था की जाए कि आम आदमी विस्फोटक पदार्थ न पा सके।

महासीपुर के राजकुमार ने कहा कि 32 वर्ष पहले दुर्घटना हुई थी लेकिन यह तो सुनियोजित वारदात है। इसकी तह तक पुलिस जाए और इससे जुड़े प्रत्येक आरोपी को गिरफ्तार किया जाए। मधुकरपुर के प्यारेलाल यादव ने कहा कि डबल मर्डर से इलाके के लोग दहशत में हैं।

हत्या करने के लिए बम जैसी सामग्री का प्रयोग गांव में किया जाएगा, यह सपने में भी नहीं सोचा जा सकता था। विस्फोटक पदार्थ गांव तक कैसे आया, इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। साथ ही, इससे जुड़े लोगों को बेनकाब कर उन्हें फांसी की सजा दी जाए।

मिर्जापुर में सोनू ने सीखा विस्फोट का तरीका

रोते- बिलखते परिजन - फोटो : amar ujala
मुन्नीलाल यादव का बेटा सोनू मिर्जापुर जिले के चुनार सहित अन्य इलाकों में रहकर विस्फोट करने का तरीका सीखा है। वह सीमेंट फैक्ट्री के अलावा पत्थर की खदानों में भी काम कर चुका है। क्राइम ब्रांच सहित अन्य टीमों की तफ्तीश में सामने आया कि सोनू की डेटोनेटर फ्यूज और आईईडी की अच्छी जानकारी है।

उसने लालजी को सरेराह धमकाया था कि यदि जमीन की तरफ देखोगे तो तुम्हे उड़ा देंगे। बुधवार की सुबह भी उसे क्षेत्र में देखा गया लेकिन इसके बाद से फरार है। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ है। बताया जाता है कि वह चंदौली निवासी अपने दोस्त के साथ कहीं बाहर भागा है।

आशंका जताई गई है कि सोनू ने मिर्जापुर, सोनभद्र या फिर इलाहाबाद से डेटोनेटर फ्यूज और आईईडी हासिल किया। इसके बाद वारदात को अंजाम देने में उसका उपयोग किया। सोनू के साथ ही वारदात में दो से तीन अन्य लोगों के शामिल होने की आशंका जांच एजेंसियों ने जताई है।

व्यक्तिगत हमले में पहली बार डेटोनेटर फ्यूज का इस्तेमाल
वारदात की जानकारी पाकर मौका मुआयना करने एडीजी जोन पीवी रामाशास्त्री और आईजी रेंज विजय सिंह मीना भी पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने कहा कि रंजिश में किसी पर हमले के लिए डेटोनेटर फ्यूज के इस्तेमाल की यह प्रदेश की पहली घटना होगी। इससे पहले ऐसा सुनने में नहीं आया था।

इसके साथ ही एलआईयू और आईबी के अधिकारी भी पहुंचे। जांच एजेेंसियों ने मौके से सैंपल एकत्र करने के साथ ही बरामद तार को कब्जे में लिया। इसके साथ ही गांव में घटना को लेकर व्याप्त तनाव को देखते हुए पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं।

जुलाई 2010 में हुआ था मंत्री पर बम से हमला

- फोटो : amar ujala
जुलाई, 2010 में प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर रिमोट बम से हमला किया गया था। स्कूटी को गली में खड़ा कर रिमोट से उड़ाने की कोशिश की गई थी। धमाके में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि नंदी गंभीर रूप से घायल हुए थे। वहीं, पूर्वांचल के बदमाशों की बात की जाए तो राजू तिवारी बम बनाने में एक्सपर्ट था जिसे एसओजी ने मुठभेड़ में मार गिराया था।

हत्याएं पहले भी हुईं
हालांकि विस्फोटक पदार्थ से धमाका कर हत्या का यह पहला मामला है। इससे पहले तीन मई की रात सारनाथ थाना अंतर्गत रजनहिया में बसंता यादव और उसके भतीजे राजेश की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। चार दिसंबर, 2015 की सुबह श्रीकंठपुर निवासी बसपा नेता और एमएलसी बृजेश सिंह के करीबी रामबिहारी चौबे पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर उनकी हत्या कर दी गई थी।

जुलाई, 2013 में बृजेश सिंह के पट्टीदार धौरहरा निवासी सतीश सिंह की नाइन एमएम की पिस्टल से गोली मार कर हत्या की गई थी। फरवरी, 2017 मेें भेलूपुर थाना अंतर्गत बिरदोपुर क्षेत्र की मीना तिवारी और उनकी बहू कल्पना की घर में घुस कर हत्या की गई थी।

चोलापुर थाना अंतर्गत उदयपुर साई गांव में नवंबर, 2016 में ऑटो चालक अमित प्रजापति का धड़ मिला था और सिर आज तक बरामद नहीं हो सका। फरवरी, 2014 में पांडेयपुर क्षेत्र में पूर्व बसपा नेेता अमीरचंद पटेल की पत्नी हीरावती देवी और ससुर खरपत्तू पटेल की घर में घुस कर हत्या कर दी गई थी।
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बेटी के पास छोटे बेटे के साथ मुंबई गई है पत्नी

- फोटो : amar ujala
लालजी यादव की बेटी मुंबई में रहती है और हाल ही में उसने बच्चे को जन्म दिया है। लालजी के परिजनों ने बताया कि उनकी पत्नी प्रभावती देवी अपने छोटे बेटे सत्यप्रकाश के साथ बेटी और नाती की देखभाल करने के लिए मुंबई गई हुई है। अजय ही अपनी मां को मुंबई छोड़कर आया था।

ग्रामीणों का कहना था कि अजय की मौत उसेे यहां बुला लाई। बुधवार को परिजनों ने राम सिंह और प्रभावती को हादसे में गंभीर रूप से घायल होने की बात कह कर दोनों को गांव लौटने के लिए कहा। परिजनों ने बताया कि पत्नी और छोटे बेटे के गांव वापस आने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि लालजी बेहद मिलनसार प्रवृत्ति के थे। अपने काम से काम रखते थे। किसी को खली-चूनी उधार देने से भी वो परहेज नहीं करतेे थे। रोजाना सुबह चार बजे से जाग कर पूजापाठ करने के बाद वो अपने दुकान पर रहते थे।
 
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