नगर निगम की ओर से हर साल बारिश के पूर्व शहर में सर्वे कराया जाता है। इसके बाद जर्जर भवनों को चिह्नित कर नोटिस देकर भवन को गिराने या मरम्मत कराने के लिए कहा जाता है। जानकारों के अनुसार वर्तमान में 402 जर्जर भवन हैं। इनमें से 55 ऐसे भवन हैं, जिनमें मकान मालिक या किरायेदार ने नगर निगम को न्यायालय में पार्टी बनाया है। बाकी बचे मामलों में मकान मालिक और किरायेदारों ने नगर निगम को पार्टी नहीं बनाया है। इस प्रकार के विवादित जर्जर मकानों को गिराने में दिक्कत आती है। नगर निगम को बेदखल करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ऐसे भवनों को गिरवाता है। तब तक हादसा न हो इसके लिए दोनों पक्ष को मकान खाली करने को कहा जाता है।