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Varanasi House Collapse: दोनों मकान मालिकों को दिया जा चुका है नोटिस, कार्रवाई के लिए गठित की जाएगी जांच कमेटी

Wed, 07 Aug 2024 08:40 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास जर्जर मकान गिरने से हुए हादसे के बाद दोनों मकान मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। मामले में कार्रवाई के लिए चार विभागों की जांच कमेटी गठित की जाएगी।
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हादसे के बाद सेवा सदन गली में ठसाठस भरे लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पास खोवा गली में हादसे के बाद अभियान चलाने की योजना बनाई गई है। यह इलाका श्री काशी विश्वनाथ विशेष क्षेत्र विकास परिषद का है। घटना के बाद नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने निरीक्षण किया। बताया कि दोनों भवनों को जर्जर घोषित कर नोटिस जारी किया जा चुका है। कार्रवाई के लिए चार विभागों की जांच कमेटी गठित की जाएगी।
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जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, विकास प्राधिकरण एवं नगर निगम के अधिकारी होंगे। संयुक्त रूप से परीक्षण के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के लिए एक मजिस्ट्रेट की तैनाती की मांग जिला प्रशासन से की जाएगी।

भवन स्वामी आशा देवी व अन्य को 2015 में दो बार नोटिस दिया गया था। इनके अलावा रमेश चंद्र गुप्ता व अन्य को 24 मई को मरम्मत कराने का नोटिस दिया गया। नोटिस में स्पष्ट निर्देशित था कि भवन जर्जर और खतरनाक है। किसी भी घटना या दुर्घटना पर भवत स्वामी की जिम्मेदारी होगी।
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इस भवन पर मकान मालिक और किरायेदारी का विवाद न्यायालय में है। इस पर भवन स्वामी ने सुरक्षा को लेकर कोई कार्य नहीं कराया। मुख्य अभियंता मोइनुद्दीन को मलबा उठाने की जिम्मेदारी दी गई। नगर निगम सीमा में 402 जर्जर भवन हैं। सभी भवन स्वामियों को नोटिस दिया गया है। हालांकि, अधिकतर भवनों में मालिक और किरायेदारी का विवाद होने पर मामला न्यायालय में चला जाता है। ऐसी स्थिति में नगर निगम की ओर से न्यायालय के आदेश पर ही कार्रवाई की जाती है।  
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जर्जर भवनों को नोटिस जारी करने के ये हैं नियम

नगर निगम की ओर से हर साल बारिश के पूर्व शहर में सर्वे कराया जाता है। इसके बाद जर्जर भवनों को चिह्नित कर नोटिस देकर भवन को गिराने या मरम्मत कराने के लिए कहा जाता है। जानकारों के अनुसार वर्तमान में 402 जर्जर भवन हैं। इनमें से 55 ऐसे भवन हैं, जिनमें मकान मालिक या किरायेदार ने नगर निगम को न्यायालय में पार्टी बनाया है। बाकी बचे मामलों में मकान मालिक और किरायेदारों ने नगर निगम को पार्टी नहीं बनाया है। इस प्रकार के विवादित जर्जर मकानों को गिराने में दिक्कत आती है। नगर निगम को बेदखल करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ऐसे भवनों को गिरवाता है। तब तक हादसा न हो इसके लिए दोनों पक्ष को मकान खाली करने को कहा जाता है। 
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