जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय ने कहा कि सरकार व जिला प्रशासन अदालत के आदेश का अनुपालन कराने को तैयार हैं। कमीशन कार्यवाही शुरू होने के बाद सर्वे कमिश्नर को बदलने की मांग का विरोध किया। वादी पक्ष की तरफ से सुधीर त्रिपाठी, सुभाषनंदन चतुर्वेदी, शिवम गौड़, अनुपम द्विवेदी, मदनमोहन ने अंजुमन इंतजामिया की आपत्ति का जोरदार विरोध किया।
उन्होंने कहा कि यह कमीशन की कार्यवाही रोकने का प्रयास है। पहले कमीशन की रिपोर्ट कोर्ट में आए फिर उस पर आपत्ति की जा सकती है या दूसरे सर्वे कमीशन की मांग की जा सकती है। सुनवाई के दौरान नियुक्त सर्वे कमिश्नर अजय मिश्र, वादिनीगण, जितेंद्र सिंह बिशेन के अलावा सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे।
ज्ञानवापी मामले पर कोर्ट का आदेश आने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष ने इसका कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि आज दिया गया कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है।
उन्होंने ट्वीट किया, ''कोर्ट का आदेश पूजास्थल अधिनियम 1991 का स्पष्ट उल्लंघन है। यह बाबरी मस्जिद मामले में दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।''
उन्होंने कहा, ''योगी सरकार को तत्काल इन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी चाहिए क्योंकि 1991 एक्ट कहता है कि जो व्यक्ति किसी धार्मिक स्थान की 15 अगस्त 1947 की स्थिति बदलने की कोशिश करता है तो कोर्ट में दोषी पाए जाने पर उन्हें तीन साल तक की सजा दी जा सकती है।''
उन्होंने आगे कहा, ''यह खुला उल्लंघन है और मुझे उम्मीद है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मस्जिद कमेटी सुप्रीम कोर्ट जाएगी। मैं बाबरी मस्जिद खो चुका हूं और मैं और मस्जिद नहीं खोना चाहता।''
जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा, साधारण दीवानी मामले को इतना तूल देकर डर का ऐसा माहौल पैदा कर दिया गया है कि जब मैं घर से बाहर होता हूं तो मेरा परिवार चिंतित रहता है। मुझे भी उनकी सुरक्षा की चिंता बनी रहती है। घर से बाहर होता हूं तो पत्नी बार बार फोन कर मेरी सुरक्षा का जायजा लेती है। कल जब लखनऊ में मेरी मां से बात हो रही थी तो वह भी मुझे लेकर चिंतित थीं। जज ने कहा, मीडिया रिपोर्ट से मेरी मां को लगा कि मैं भी सर्वे के लिए मौके पर जाने वाला हूं। उन्हें इतनी चिंता थी कि मुझे जाने से मना कर दिया।