फ्लाईओवर हादसे के बाद ट्रैफिक डायवर्जन पर वाराणसी पुलिस-प्रशासन और सेतु निगम आमने-सामने आ गए हैं। पुलिस प्रशासन के दावे के विपरीत सेतु निगम के अभियंताओं का कहना है कि बीते फरवरी महीने में यातायात में बाधा पैदा करने के नाम पर उनके विरुद्ध सिगरा थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। इसके मद्देनजर पुलिस के दबाव में ही उन्होंने निर्माण कार्य स्थल की बैरिकेडिंग पीछे खिसकाई थी।
चौकाघाट फ्लाईओवर हादसे के बाद सेतु निगम मुख्यालय लखनऊ में मंगलवार को हुई बैठक में निर्माण कार्य से जुड़े अभियंताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने अपना यह पक्ष रखा। मुख्यालय के उच्चाधिकारियों ने इस दौरान फ्लाईओवर निर्माण से जुड़े सभी रिकार्ड की जांच की।
दरअसल, जिस स्थान पर 55 टन वजनी बीम गिरा, वहां सड़क से सटी रेलवे कॉलोनी की दीवार है। लोहे की बैरिकेडिंग के चलते वहां रास्ता काफी संकरा हो गया था। इसके चलते जाम लग रहा था। जाम की समस्या से निबटने के लिए जहां दीवार तोड़कर सर्विस रोड को चौड़ा करने की जरूरत थी।
सेतु निगम के अभियंताओं का कहना है कि दीवार तोड़वाने के बजाए पुलिस-प्रशासन ने बैरिकेडिंग खिसकाने के लिए दबाव बनाया। इंजीनियरों की मानें जहां कहीं भी निर्माण कार्य होता है, वहां सामान गिरने का खतरा बना रहता है।
खासकर ओवरहेड काम के दौरान विशेष सतर्कता की आवश्यकता होती है लेकिन ट्रैफिक डायवर्जन की पुलिस-प्रशासन ने ठोस पहल नहीं की। उधर, पुलिस-प्रशासन और सेतु निगम के बीच ट्रैफिक डायवर्जन के इस गतिरोध पर विशेषज्ञों का कहना है कि सेतु निगम और पुलिस-प्रशासन दोनों स्तरों पर चूक हुई।
किसी तरह के गतिरोध पर जिला प्रशासन और शासन के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा किसी की ओर से नहीं किया गया।