आखिरकार जिसका डर था वही हुआ। जाम के झाम में फंसकर मंगलवार को कई लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी। वाराणसी कैंट स्टेशन पर बन रहे फ्लाईओवर का स्लैब जब गिरा तो उस दौरान सड़क पर जाम लगा हुआ था। गाड़ी भगाना तो दूर लोगों को वाहन से बाहर निकलने तक का मौका नही मिला। इसे लेकर आम जनता में जबरदस्त रोष है।
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स्लैब के नीचे दबी गाड़ियों की हालत देखकर उनकी स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। चकनाचूर सिटी बस, ऑटो, बाइक, कारें, सब लगभग एक दूसरे से सटी खड़ी हैं। इसका कारण सड़क पर जाम रहा। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो मंगलवार की शाम भी यहीं हालात थे।
जब स्लैब गिरने लगा तो किनारे चल रहे बाइक सवार अपने वाहन छोड़ कूद गए। इसके चलते कई की जान बच गई। वहीं सिटी बस, कारें, ऑटो और बीच में चल फंसी बाइक सवार इसकी चपेट में आ गए। लोगों ने बताया कि कुछ लोग तो कार का दरवाजा खोल चुके थे पर उनके निकलने से पहले स्लैब आकर गिर पड़ा।
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एक स्लैब से बचने के चक्कर में कुछ लोग दूसरी स्लैब की चपेट में आ गए। हर कोई काशी की यातायात व्यवस्था को कोसता रहा। लोगों का कहना था कि अगर जाम न होता तो इतनी मौतें न होतीं।
कैंट रेलवे स्टेशन से लेकर लहरतारा ओवरब्रिज तक अक्सर जाम लगा रहता है। यदि पुलिस और प्रशासन के स्तर से गंभीरता बरती गई होती तो शायद यह हादसा न हुआ होता और इतने लोगों की मौतें न होती।
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आठ क्रेन भी मिलकर नहीं हिला सकी बीम को
घटना के डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंची पहली क्रेन
- फोटो : अमर उजाला
निर्माणाधीन ओवरब्रिज के दो गिरे हुए बीम उठाने के लिए आठ क्रेन लगानी पड़ी। प्रशासन की लापरवाही का आलम यह और सबसे दुखद बात तो यह रही कि पहली क्रेन बीम गिरने के लगभग डेढ़ घंटे बाद शाम सात बजे मौके पर पहुंची। इसके करीब पांच मिनट बाद दूसरी क्रेन मंगाई गई। सीमेंट और कंक्रीट के बीम इतने भारी थे कि दो क्रेन मिलकर भी उन्हें हिला नहीं पा रहे थे। क्रेन के लिए जगह बनाने सड़क के किनारे रेलवे की दीवार तोड़नी पड़ी।
स्थानीय युवकों रामकिशुन, अजीत, फेकू, रामाअश्रय, प्रदीप, रतन, भोला, नंदू, अशरफ, रामबचन, सोनू, नारायण आदि कई लोगों ने लकड़ी के कुंदे से मार-मार कर दीवार तोड़ी इसके बाद क्रेन के लिए जगह बन पाई। दो क्रेनों के जरिए बीम को उठाने की कोशिश की गई लेकिन बीम हिलने की बजाय क्रेन ही अपनी जगह से बार-बार उठ जा रही थी।
क्रेन का संतुलन बनने के लिए दो-दो दर्जन लोगों को क्रेन के पिछले हिस्से पर खड़ा किया गया। इसके बाद भी क्रेन काम नहीं कर पा रही थे। मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने उच्चाधिकारियों को घटना की गंभीरता फोन से बताई। उसके करीब पौने घंटे बाद लगभग सात बजे छह और क्रेन एक के पीछे एक मौके पर पहुंची। क्रेन को बीम तक ले जाने के लिए जगह ही नहीं बन पा रही थी।
क्रेन के लिए जगह बनाने के लिए भीड़ में अफरा-तफरी मच गई। कोई पुलिस के साथ मिलकर भीड़ को हटाने में लग गया तो कोई रास्ता बनाने के लिए निर्माणाधीन ओरवब्रिज के नीचे रखी निर्माण सामग्री इधर उधर फेंकने लगा। कुछ लोग-लोहे की बैरिकेडिंग हटाने में लग गए तो दर्जनों लोग ओवरब्रिज के नीचे रखी सरिया और अन्य समग्री इधर-उधर फेक कर क्रेन के लिए रास्ता बनाने लगे।
आठ क्रेन एक साथ लगाने के बाद भी जब बीम को टस से मस नहीं किया जा सका तो आठ जेसीबी भी मौके पर बुलाई गई। शाम साढ़े सात बजे आठ जीसीबी मौके पर पहुंची। इन सभी जेसीबी को एक-एक क्रेन के पीछे लगाया गया। जेसीबी के अगले हिस्से से क्रेन के पिछले हिस्से को दबाया गया। आठों क्रेन एक साथ लगीं तब जाकर वाहनों के ऊपर गिरे बीम को सरकाया जा सका।
हादसे का शिकार हुआ फ्लाईओवर निर्माण काल से ही विवादों में रहा। जुलाई 2017 में ही इस फ्लाई ओवर की डिजाइन को लेकर सवाल खड़े होने लगे थे। कहा जाने लगा था कि जिम्मेदारों ने फ्लाईओवर की ऐसी डिजाइन बना दी है, जो भारी वाहनों के लिए मुसीबत बन गई है।
रोडवेज बस स्टेशन के ठीक सामने से चौकाघाट की ओर शुरूआत में चार पिलर और डेक स्लैब बनते ही भारी वाहनों के चोट से हिल गए थे। इस समस्या का कोई स्थायी निदान अफसरों को नहीं सूझ रहा था, ऐसे में यूपी राज्य सेतु निर्माण निगम के अफसरों ने इस खामी को छिपाने के लिए बैरियर लगाकर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दिया था।
शुरुआत से चार पिलर व डेक स्लैब अप्रैल 2017 में बने थे, तभी से भारी वाहनों के ऊपरी हिस्से से टकराकर हिलने लगे थे। यह स्थिति तब पैदा हुई जब पिलर व डेक स्लैब बन ही रहे थे। स्थिति बिगड़ते देख सेतु निगम ने भारी वाहनों की एंट्री रोक दी थी। चूंकि सर्विस लेन के ठीक बगल से रेलवे की पटरी गुजरी है, इसलिए चहारदीवारी को हटाना संभव नहीं था।
तब सर्विस लेन नहीं बनी थी इसलिए डेक स्लैब कम क्षतिग्रस्त हुआ था। उसी वक्त यह आशंका जताई जा रही थी कि जब पीडब्ल्यूडी सड़क बनाएगा तो सड़क की ऊंचाई और अधिक हो जाएगी। यह डेक स्लैब के लिए कतई ठीक नहीं होगा। उस स्थिति में भारी वाहनों का ऊपरी हिस्सा और ज्यादा टकराएगा, इससे समस्या और विकराल रूप लेगी इससे इंकार नहीं किया जा सकता।
बता दें कि पहले इस फ्लाईओवर को पूरा करने की समय सीमा दिसंबर 2017 थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर मार्च 2017 कर दिया गया। लेकिन बाद में फिर से इसकी मियाद बढ़ा दी गई।
तब फ्लाईओवर की खामी को लेकर अफसरों ने दबी जुबान से स्वीकार किया था कि कुछ डेक स्लैब से भारी वाहन लड़ रहे हैं, इसी वजह से कैंट साइड की ओर कुछ डेक स्लैब का निचला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। इसीलिए पिछले दिनों भारी वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई ताकि फ्लाईओवर पर बुरा असर न पड़े। भविष्य में भारी वाहन न चले तो ही फ्लाईओवर के लिए अच्छा होगा।