वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के समीप निर्माणाधीन फ्लाईओवर के दो बीम गिरने से हुई 15 लोगों की मौत के मामले में सात दिन बाद भी पुलिस की कार्रवाई साक्ष्य एकत्र करने और पूछताछ तक सीमित है। हालांकि जांच में सामने आया है कि जिस वक्त हादसा हुआ, उस वक्त फ्लाईओवर पर निर्माण कार्य कराया जा रहा था।
मामले की तफ्तीश कर रही क्राइम ब्रांच का कहना है कि सेतु निगम के निलंबित एमडी राजन मित्तल से पूछताछ करने के लिए जल्द ही एक टीम लखनऊ जाएगी।
उधर, पुलिस की तफ्तीश में देरी पर आमजन भी सवाल उठाने लगे हैं। गौरतलब है कि निर्माणाधीन चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के दो बीम रेलवे की एईएन कॉलोनी के सामने सड़क पर गिर गए थे।
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बीम के नीचे दबे वाहनों में सवार 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। मामले को लेकर पुलिस की ओर से 16 मई को सिगरा थाने में सेतु निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। एसएसपी ने क्राइम ब्रांच को मुकदमे की विवेचना सौंपी। तब से लेकर अब तक पुलिस की तफ्तीश पूछताछ, बयान दर्ज करने और साक्ष्य एकत्र करने तक ही सीमित है।
वहीं, हादसे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख बेहद सख्त है और उन्होंने कहा है कि दोषी किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे। इसके बावजूद कछुआ की गति से चल रही पुलिस की तफ्तीश से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो सिर्फ जांच ही होगी और आरोपी खुलेआम घूमते रहेंगे।
इस बीच, सोमवार को भी इंग्लिशिया लाइन तिराहा से लहरतारा चौराहा के बीच चारपहिया वाहनों का आवागमन शुरू नहीं हो सका। इससे कैंट-लहरतारा के बीच यात्रियों को आवागमन में खासी परेशानी उठानी पड़ी।
मजिस्ट्रियल जांच की रफ्तार सुस्त
जिलाधिकारी की ओर से कराई जा रही मजिस्ट्रियल जांच की रफ्तार भी बेहद धीमी है। तीन प्रत्यक्षदर्शियों के बाद सेतु निगम के निलंबित अधिकारियों का बयान लेने के बाद जांच अधिकारी अब कुछ और प्रत्यक्षदर्शियों की तलाश में हैं। हालांकि जांच अधिकारी का दावा है कि कई तथ्यों को जांच में शामिल किया गया है और निर्धारित समय में जांच रिपोर्ट दे दी जाएगी।