डीएम सुरेंद्र सिंह ने लमही को एक ऐसा पर्यटक स्थल बनाने की घोषणा की जहां पाठकों, दर्शकों व पर्यटकों का आना-जाना बना रहे। उन्होंने प्रतिबद्धता जाहिर की कि हमारी सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम स्मारक भवन को वृहद रूप देकर म्यूजियम के रूप में विकसित कर सकें। मुंशी प्रेमचंद की जन्म स्थली को विश्व पटल पर लाने का प्रयास किया जाएगा।
डीएम सुरेंद्र सिंह ने कहा कि आगामी लमही महोत्सव से पहले संस्कृति विभाग द्वारा एक बड़ा संग्रहालय बनाया जाएगा जिसका प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है। इस दौरान 'बड़ी परेशानी है भाई' हंस पब्लिकेशन की पुस्तक का विमोचन डीएम ने किया।
इसके साथ ही डीएम ने लमही के लेखपाल और सचिव को तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए। प्रोबेशनर आईएएस विक्रमादित्य सिंह मलिक को निर्देशित किया कि वहां के भवन पर रुफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने तथा सोखते गड्ढे और जल संरक्षण के समस्त कार्य कराने की पड़ताल कर लें।
मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही मूलभूत सुविधाओं से वंछित है। जिसका उदाहरण पांडेयपुर चौराहे से लमही स्मारक स्थल तक की सड़क है। पांडेयपुर से लमही प्रवेश द्वार के बीच कई जगह सड़क खोदकर छोड़ दी गई है। स्वच्छता का मजाक बना हुआ है।
मुंशी जी के आवास के पीछे व रामलीला मैदान की क्षतिग्रस्त सड़क पर बरसाती तथा घरों का गंदा पानी जमा है। इससे साफ है कि प्रेमचंद के पात्र लमही के ग्रामीण उसी दुर्दशा में जीवन गुजार रहे हैं। जिसे देखते हुए वाराणसी के डीएम ने इस गांव को गोद लेने का फैसला लिया है।