वाराणसी जिला कारागार में दो साल पहले दो अप्रैल को साढ़े सात घंटे तक मारपीट, पथराव, आगजनी और हवाई फायरिंग हुई थी। इस बवाल की विभागीय, मजिस्ट्रेटियल और न्यायिक जांच कराई गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के तत्कालीन जेल मंत्री बलवंत सिंह रामू वालिया ने जिला कारागार का दौरा कर बंदियों से बातचीत की। मगर, इन सारी कवायदों के बावजूद जिला कारागार के हालात जस के तस हैं। उपद्रव में खराब हुए सीसीटीवी कैमरे दो साल बाद भी दुरुस्त नहीं किए जा सके हैं।
वहीं, टू जी सिम पर अंकुश लगा सकने वाले जैमरों के लगे होने के कारण अब भी थ्री जी और फोर जी सिम से बंदी धड़ल्ले से बातचीत करते रहते हैं। जिला जेल की क्षमता 747 बंदियों की है लेकिन रविवार को यहां 1815 बंदी निरुद्ध थे।
दो अप्रैल 2016 को हुए बवाल के पीछे का तात्कालिक कारण पेशी पर बंदियों को ले जाए जाने के दौरान बंदीरक्षकों द्वारा पैसा मांगना और न मिलने पर मारपीट करना बताया गया था।
इसके अलावा गुणवत्ता युक्त भोजन का न मिलना, सुविधाओं के बदले जेल कर्मियों द्वारा अवैध वसूली किया जाना और बंदियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी उपद्रव के अहम कारण थे।
हालांकि, जेल की चहारदीवारी के भीतर हुई इस घटना को लेकर जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक कोई सीख नहीं ली गई और सब कुछ जैसे का तैसा चल रहा है।