उपभोक्ताओं को पांच लाख रुपये तक के दावा दायर करने के लिए कोर्ट फीस नहीं देनी होती है। पांच से 10 लाख रुपये तक के दावा के लिए कोर्ट फीस 200 रुपये है। 10 से 20 लाख रुपये तक के दावा के लिए कोर्ट फीस 400 रुपये है। 20 से 50 लाख रुपये तक के दावा के लिए कोर्ट फीस एक हजार रुपये है।
अधिकारी बोले
हमारे पास एक ही टाइपिस्ट है। एक आदेश सामान्य तौर पर 15 से 16 पेज का होता है। इसलिए एक दिन में अधिकतम दो शिकायतों पर ही आदेश करना संभव हो पाता है। यदि तीन से चार स्टेनो हों तो रूटीन के कामकाज में काफी तेजी आ जाएगी। -डॉ. सुरेंद्र कुमार, सदस्य, जिला उपभोक्ता फोरम
नेवादा, सुंदरपुर निवासी अजय मौर्या के पिता रामजीत मौर्या ने रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से बीमा कराया था। 26 जुलाई 2010 को 62500 रुपये लेकर पॉलिसी को पुनर्जीवित कराया गया था। 11 अक्तूबर 2010 को रामजीत मौर्य की मृत्यु हो गई। बीमित राशि ढाई लाख रुपये थी, लेकिन कंपनी ने 68440 रुपये का भुगतान ही किया। शेष भुगतान के लिए कंपनी की ओर से टालमटोल किया जाने लगा। आजिज आकर अजय ने चार नवंबर 2012 को उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। 12 साल बाद एक जुलाई 2014 को उपभोक्ता फोरम ने अजय के पक्ष में आदेश सुनाया कि वीमा कंपनी एक लाख 81 हजार 560 रुपये और तीन हजार रुपये वाद खर्च दे।
शिवपुर निवासी आनंद कुमार केशरी ने 14 दिसंबर 2018 को ओयो रूम्स डॉट काम से कोलकाता में एयरपोर्ट के समीप स्थित होटल में कमरा बुक कराया। वहां से उन्हें हवाई केस 2 जहाज से गोवा जाना था। कोलकाता पहुंचने पर उन्हें पता लगा कि उनका कमरा निरस्त कर एयरपोर्ट से दूर एक अन्य होटल में बुक कर दिया गया है। इस वजह से उनका विमान छूट गया। दूसरे विमान से गोवा जाने पर उन्हें एक लाख 50 हजार रुपये का नुकसान हुआ। इसकी शिकायत आनंद ने 28 जून 2019 को उपभोक्ता फोरम में की। लगभग पांच साल एक माह बाद फोरम ने आनंद को एक लाख 50 हजार रुपये प्रतिकर और | पांच हजार रुपये वाद खर्च देने का आदेश सुनाया।
बिहार के रोहतास जिले के दीनानाथ पाल 21 अगस्त 2018 को विलूपुरम से मंडुवाडीह का आरक्षित टिकट रामेश्वरम-वाराणसी एक्सप्रेस से लिए। टिकट पर उनका नाम और उम्र गलत दर्ज हो केस 3 गई थी और बहुत पढ़े-लिखे न होने के कारण उन्होंने उस पर ध्यान नहीं दिया। ट्रेन में टीटी को उन्होंने टिकट के साथ अपना परिचय पत्र दिखाया, इसके बावजूद उनसे 1020 रुपये जुर्माना लगाया गया। दीनानाथ पाल ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। लगभग छह साल बाद 14 मई 2024 को फोरम ने आदेश सुनाया कि उत्तर-मध्य रेलवे कैंट के डिवीजनल रेल प्रबंधक जुर्माने के 1020 रुपये, वाद खर्च 2000 रुपये और मानसिक परेशानी के लिए 5000 रुपये दीनानाथ को भुगतान करें।