रोड के साइड में बनाई गईं कलाकृतियां।
- फोटो : अमर उजाला
कोई गंगा में चलने वाले नावों को बना रहा तो कहीं बनारस घराने की संगीत परंपरा की दृश्य नजर आएगी। इसके अलावा वाद्य यंत्र और मारवाड़ी शैली के वस्त्रों की आकृति को भी तैयार कराया जा रहा है। डॉक्टर अरोरा के अनुसार, इसे इंस्टॉलेशन आर्ट कहा जाता है। रिक्शा-ठेला, कूड़ा उठाने वाली गाड़ी और ट्रकों-ट्रैक्टर के पुराने टायर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एयरपोर्ट से लेकर घाट तक दिखेगी कला
बाबतपुर एयरपोर्ट से लेकर घाट तक कलाकृति दिखेगी। इसमे एयरपोर्ट से संत अतुलानंद क्रॉसिंग, बूंदी परकोटा घाट को कलाकृति के निर्माण के लिए चुना गया है। जहां सबसे पहले एयरपोर्ट की तरफ से शहर में प्रवेश करने के दौरान बनारस घराने की संगीत परंपरा की पुरातन थाती से रूबरू कराने वाले तबला, सितार सहित अन्य वाद्य यंत्रों का इंस्टालेशन तैयार किया जा रहा है।
जबकि अतुलानंद क्रॉसिंग पर बनारस के प्रसिद्ध नावों का दृश्य लोगों को देखने को मिलेगा। गंगा किनारे बूंदी परकोटा घाट पर मारवाड़ी शैली के वस्त्रों की कला लोग देख सकेंगे। इस पूरे इंस्टालेशन आर्ट का निर्माण संकाय के छात्र गौरव मिश्रा, हितेश चौधरी, अश्विनी सिंह, विकास यादव और अनिल कुमार कर रहे हैं।