मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा और, काशी में मंदिर के महंत।
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पीएम मोदी ने कहा कि ये गिरोह अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन्हें बहुत ऊंची कीमत पर बेचते हैं। अब इन पर सख्ती तो लगाई ही जा रही है, इनकी वापसी के लिए अब भारत ने अपने प्रयास भी बढ़ाएं हैं। ऐसी कोशिशों की वजह से, बीते कुछ वर्षों में भारत कई प्रतिमाओं और कलाकृतियों को वापस लाने में सफल रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा की वापसी के साथ एक संयोग यह भी जुड़ा है कि कुछ दिन पहले ही वर्ल्ड हेरिटेज वीक मनाया गया है। वर्ल्ड हेरिटेज वीक संस्कृति प्रेमियों के लिए, पुराने समय में वापस जाने, उनके इतिहास के अहम पड़ावों को पता लगाने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है।
19 नवंबर को भारतीय उच्च आयोग को मिली प्रतिमा
हाल ही में भारतीय मूल की आर्टिस्ट दिव्या मेहरा की नजर माता अन्नपूर्णा की एक सदी पुरानी मूर्ती पर कनाडा के मैकेंजी आर्ट गैलेरी में नजर पड़ी थी। उन्होंने इसके लिए आवाज उठाई और उसके बाद मैकेंजी आर्ट गैलरी में रेजिना विश्वविद्यालय के संग्रह से अन्नपूर्णा की प्रतिमा को अंतरिम राष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के उप-कुलपति थॉमस चेस, कनाडा में भारत के उच्चायुक्त अजय बिसारिया के बीच 19 नवंबर को एक समारोह में दी गई।
भारतीय मूल की कलाकार ने उठाया मुद्दा
आर्टिस्ट दिव्या मेहरा ने मैकेंजी आर्ट गैलरी के स्थाई कलेक्शन में पाया कि इस मूर्ति की वसीयत 1936 में मैकेंजी ने करवाई थी और गैलरी के संग्रह में जोड़ा गया था। इसके बाद इसका नाम रखा गया। दिव्या ने मुद्दा उठाया और कहा था कि यह अवैध रूप से कनाडा में लाई गई है।
1913 में भारत से कनाडा गई मूर्ति
मैकेंजी ने 1913 में भारत की यात्रा की थी। बताया जा रहा है कि यह मूर्ति उसी के बाद यहां से कनाडा पहुंची। अन्नपूर्णा माता अपने एक हाथ में खीर और दूसरे में चम्मच लिए हुए हैं। बलुआ पत्थर की यह प्रतिमा सौ साल पुरानी है।