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Cyber Crime: वाराणसी में 11 महीने में 41 करोड़ की साइबर ठगी, सिर्फ 2.15 करोड़ रुपये लौटे

Sat, 29 Nov 2025 02:47 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में 11 महीने में 41 करोड़ की साइबर ठगी हुई, लेकिन सिर्फ 2.15 करोड़ रुपये लौटे। वजह है कि यहां छोटी साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की रकम डूब जा रही है। 
 
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साइबर अपराध - फोटो : AI Image- Freepik
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विस्तार
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छोटी साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की रकम डूब रही है। मामलों को दर्ज करने में लोकल थाना या साइबर थाना पुलिस एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे और पीड़ित चक्कर काट रहे हैं। 11 महीने में साइबर सेल व साइबर थाने में 41 करोड़ की साइबर ठगी के मामले सामने आए। इसमें 12 प्रतिशत रकम ही होल्ड की जा सकी। सिर्फ 4.88 प्रतिशत राशि यानी 2.15 करोड़ रुपये ही रिफंड हो सके। 

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साइबर ठगी के जिन मामलों में शिकायत दर्ज हुई उसकी मौजूदा स्थिति क्या है, पैसे वापस मिलने की उम्मीद है भी की नहीं ये पीड़ितों को नहीं पता। साइबर थाना या स्थानीय थानों पर शिकायत दर्ज कराने के लिए अगर कोई पहुंचे तो उसे साइबर कैफे भेज दिया जाता है। सबसे अधिक शिकायतें क्रेडिट कार्ड अपडेट, बैंक केवाईसी और लोक लुभावने ऑनलाइन ऑफर का झांसा देकर ठगी के हैं। 

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दर्ज प्राथमिकी में महज 22% में ही सफलता 

छह महीनों के आंकड़े पर नजर डालें तो पांच लाख रुपये से अधिक राशि वाले 86 साइबर ठगी की शिकायतों में से महज 22 प्रतिशत मामलों में प्राथमिकी दर्ज हुई है। बाकी मामलों में जांच के नाम पर फाइल लंबित है। 

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240 दिन में 86 मामले पांच लाख से ऊपर के 
अप्रैल से दो नवंबर के बीच पांच लाख के ऊपर के फ्रॉड के 86 मामले सामने आए, जिसमें 18 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई। बाकी लंबित हैं। 27 अक्तूबर और दो नवंबर के बीच छह मामले आए जो अंडर प्रोसेस है।
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केस एक
सिगरा निवासी विकास के साथ 2023 जून में क्रेडिट कार्ड पर बीमा एक्टिव होने की बात कहकर ओटीपी पूछा और 34 हजार निकाल लिए। थाने में सुनवाई नहीं हुई तो साइबर थाने पहुंचे। यहां से साइबर कैफे भेज दिया गया। ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। प्रकरण में क्या हुआ पता नहीं।

केस दो
भेलूपुर निवासी अमलेंदु दूबे ने बताया कि इस साल मई में एक लाख रुपये का साइबर फ्रॉड हुआ था। उन्होंने बैंक की मिलीभगत की बात कही थी। साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई तो उन्होंने चंदौली में जाकर प्राथमिकी दर्ज कराई।

केस तीन
पहड़िया निवासी विक्की सिंह के साथ एक साल पहले साइबर जालसाजों ने बिजली बिल के नाम पर 41 हजार की साइबर ठगी की थी। इस मामले में साइबर थाने और स्थानीय थाने के चक्कर लगाने के बाद उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराने से इन्कार कर दिया।

क्या बोले अधिकारी
साइबर फ्रॉड से जड़े मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए हैं। प्राथमिकी न दर्ज करने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। बड़े मामलों में कमिश्नरेट पुलिस रकम होल्ड कराने के साथ ही कानूनी प्रक्रिया के तहत पैसे रिकवर कर रही है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। -सरवणन टी, डीसीपी क्राइम

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