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ऑनलाइन सजी एक शाम अमन के नाम में हुआ काव्य पाठ

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वाराणसी। अनचाहे अनुबंध मुझे स्वीकार नहीं, प्रियता पर प्रतिबंध मुझे स्वीकार नहीं... संदीप मिश्रा सरस की काव्य रचना ने ऑनलाइन उपस्थित हर श्रोता को आनंद से भर दिया। उन्होंने काव्य का विस्तार देते हुए कहा कि जो अपना लगता है, अपना लेता हूं, शर्तों पर संबंध मुझे स्वीकार नहीं...। सोमवार को काशी विद्यापीठ के छात्र कल्याण संकाय एवं कैंपस प्लेसमेंट सेल के तत्वावधान में आयोजित एक शाम अमन के नाम सांस्कृतिक कार्यक्रम में कवियों, कहानीकार, कलाकार और शिक्षाविदों का संगम हुआ।
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पद्मभूषण भगवती चरण वर्मा के पौत्र चंद्रशेखर वर्मा ने अपने लिखे शेर से इस सुरमयी शाम में रंग घोल दिए। उन्होंने शेर सोच रहे हैं आज उन्हें हम किस तरकीब से देखेंगे, आंखों से देखेंगे या फिर अपने नसीब से देखेंगे... पढ़ा तो श्रोता भी वाहवाह करने से खुद को रोक नहीं सके। चंद्रकांता धारावाहिक में क्रूर सिंह की भूमिका निभा चुके अखिलेंद्र मिश्र ने दान एवं चेतावनी शीर्षक पर दो कविताओं का पाठ किया। कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने सभी का धन्यवाद किया।
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