विशाल सिंह का शव मिलते ही बेसुध परिजन।
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अभिषेक की कॉलोनी में रहने वाले उसके दोस्त विशाल के परिजनों का भी यही हाल था। अपने पिता के बुनकरी के काम में हाथ बंटाने वाले शाहिद जुनैद और शाहनवाज के परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। चारों युवकों के परिजनों में से कोई अपनी किस्मत को कोस रहा था तो कोई नाविक को अपने दुख के लिए कसूरवार ठहरा रहा था। युवकों के शव बारी-बारी से बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो परिजनों के विलाप से वहां का माहौल भी गमगीन हो उठा।
एमसीए कर चुके विशाल का हुआ था कैंपस प्लेसमेंट
विशाल दो भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ा था। जालंधर से एमसीए करने के बाद कैंपस प्लेसमेंट हुआ था। विशाल का शव गंगा से बाहर निकाला गया तो उसके रिटायर्ड फौजी पिता अनिल कुमार सिंह ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। काफी देर तक पुलिस उन्हें समझाती रही कि पोस्टमार्टम जरूरी है। तब जाकर शव को बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस के लिए भेजा गया। विशाल का शव देख कर बैंक में काम करने वाले अनिल, उनकी पत्नी सुमन की हालत बेसुधों जैसी थी। परिजन बड़ी मुश्किल से चारों को संभाले हुए थे।