आनंद अग्रवाल की मृत्यु के बाद उनके पुत्र गुंजन अग्रवाल ने 29 सितंबर 2018 की कथित अपंजीकृत वसीयत के आधार पर स्वयं को उत्तराधिकारी बताते हुए न्यायालय में प्रतिस्थापन प्रार्थना पत्र दाखिल किया। राज्य सरकार की आपत्ति पर न्यायालय ने 18 नवंबर 2022 को वसीयत का विधिवत साक्ष्य प्रस्तुत न होने के कारण प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था।
लेखपाल ने जो तहरीर दी है, उसमें आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद उसी कथित फर्जी वसीयत और अन्य दस्तावेजों के आधार पर सरकारी संपत्ति पर अधिकार स्थापित करने और नामांतरण कराने का प्रयास किया गया।
साथ ही सरकारी अभिलेखों में हेरफेर कर राज्य संपत्ति को निजी नाम पर दर्ज कराने की साजिश रची गई। कैंट थाना प्रभारी राजकिशोर पांडेय ने बताया कि इस मामले में स्मृता गोयल, इला अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, शरद अग्रवाल, मयंक अग्रवाल और गुंजन अग्रवाल को नामजद किया गया है। सभी पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।