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सीएम योगी का काशी दौराः अच्छी तस्वीरें पेश कर फिर हकीकत पर परदा डाल गए जिम्मेदार

Mon, 28 Aug 2017 10:38 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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मुख्यमंत्री के तीसरे दौरे में भी बना रह गया उनके निर्देशों के पूरा होने का इंतजार - फोटो : अमर उजाला
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योगी आदित्यनाथ का मुख्यमंत्री बनने के बाद वाराणसी का यह तीसरा दौरा था। अपने पिछले दो दौरों में उन्होंने बुनियादी सुविधाओं की बदहाली और लंबित परियोजनाओं पर जलकल, जलनिगम और नगर निगम को सीधे तौर पर चेतावनी दी थी।
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पुलिस को भी कटघरे में खड़ा किया था लेकिन मुख्यमंत्री के तीसरे दौरे में भी जिम्मेदारों ने सफाई से अपनी गर्दन बचा ली। अच्छी तस्वीरों के जरिए हकीकत पर परदा डालने में सफल हुए जिम्मेदारों के लिए हालांकि लंबित परियोजनाओं को तय समय पर पूरा कराने की चुनौतियां अब भी कम नहीं। मुख्यमंत्री के तीसरे दौरे में भी शहर के लिए उनके निर्देशों के पूरा होने का इंतजार बना ही रह गया।

मुख्यमंत्री के यहां पहुंचने से पहले नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना और उनके दूत के रूप में प्रमुख राजस्व रजनीश दूबे ने विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया था। सूत्रों की मानें तो उनके जरिए सीएम को काशी के बारे में अच्छा फीडबैक मिला था।
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शनिवार को हुई समीक्षा बैठक में भी सीएम के सामने अच्छी तस्वीर पेश की गई। नतीजा, उन्होंने जलकल, जलनिगम, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और पुलिस विभाग को एकबारगी फिर हिदायत देकर छोड़ दिया।

जबकि, सीएम पहली बार जब 27 मई को काशी आए थे। तब ही उन्होंने कमिश्नरी सभागार में करीब साढ़े तीन घंटे तक कानून व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा की थी। पेयजल, सड़क, सीवर, सफाई सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की खस्ताहाली पर जमकर फटकार लगाई थी।

अपराधियों के दस साल के रिकार्ड खंगालने, भू और वन माफिया पर कार्रवाई करने को कहा था। दूसरे दौरे में तो पेयजल योजना व वरुणा कॉरिडोर पर सिंचाई विभाग और जल निगम के अधिकारियों को उन्होंने दो टूक कहा कि काम में सुधार ले आएं नहीं तो पूरे स्टाफ को सस्पेंड कर दूंगा।

परियोजनाओं के लिए समयसीमा तय की लेकिन अधिकतर योजनाओं की समयावधि उसके बाद भी बार-बार बढ़ाई जा रही है। कोई काम समय से पूरा नहीं हो पा रहा है। बुनियादी सुविधाओं के लिए शहर परेशान है। 
 
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कैंट थाने का 20 मिनट तक किया निरीक्षण

पुलिस को ताकीद, काम ऐसा करें कि जनता का विश्वास हासिल हो - फोटो : अमर उजाला
जमीन संबंधी विवाद, जिन्हें पैमाइश के जरिए सुलझाया जा सकता है, उन्हें कतई न लटकाया जाए। राजस्व विभाग और पुलिस की यह जिम्मेदारी है कि हर हाल में 72 घंटे के अंदर पैमाइश कराकर विवाद हल कराए। कैंट थाने के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये निर्देश दिए।

इसके लिए समन्वय की जिम्मेदारी मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण और एडीजी जोन बी महापात्रा को सौंपी। साथ ही, थानों पर सीज और बरामद कर खड़े किए गए वाहनों का निस्तारण समिति बनाकर कराने का निर्देश दिया। 

मुख्यमंत्री ने करीब 20 मिनट तक थाने का निरीक्षण किया। सबसे पहले जन शिकायत पंजीकृत करने के लिए बैठे कांस्टेबल के पास रखा आगंतुक रजिस्टर देखा और पूछा कि कल कितनी शिकायतें आईं थी और आज कितनी शिकायतें आई हैं।

इसके बाद थाना प्रांगण में बने मंदिर के सामने शीश झुकाते हुए रिकॉर्ड रूम में पहुंचे। समाधान दिवस पर आने वाले मामलों के निस्तारण और त्योहार रजिस्टर के बारे मेें पूछताछ की। इसके बाद कंप्यूटर कक्ष होते हुए बैरक, मालखाना और हवालात का जायजा लिया।

अपराध रजिस्टर - नंबर 4 और ग्राम्य अपराध रजिस्टर - नंबर आठ के बारे में जानकारी ली। कैंट इंस्पेक्टर को रिकार्डों के बेहतर रखरखाव और साफ-सफाई की हिदायत दी। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि संबंधी विवादों के निबटारे में तेजी लाई जाएगी।

थानों पर आने वाले फरियादियों से पुलिस आत्मीयता से पेश आए। दावा किया कि पहले की तुलना में थानों और पुलिस की कार्यशैली में सुधार आया है। हालांकि अभी इसमें और बेहतरी की गुंजाइश है।

पुलिस कर्मियों, अधिकारियों से कहा कि जनता का विश्वास जीतें। थाना दिवस पर आने वाली शिकायतों को बेहद आत्मीयता और तत्परता से निबटाएं। इस दौरान कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने धौंस जमाते हुए थाने के अंदर घुसने की कोशिश की लेकिन सीएम की सुरक्षा में तैनात अधिकारियों के आगे उनकी एक नहीं चली। 
 
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