योगी आदित्यनाथ का मुख्यमंत्री बनने के बाद वाराणसी का यह तीसरा दौरा था। अपने पिछले दो दौरों में उन्होंने बुनियादी सुविधाओं की बदहाली और लंबित परियोजनाओं पर जलकल, जलनिगम और नगर निगम को सीधे तौर पर चेतावनी दी थी।
पुलिस को भी कटघरे में खड़ा किया था लेकिन मुख्यमंत्री के तीसरे दौरे में भी जिम्मेदारों ने सफाई से अपनी गर्दन बचा ली। अच्छी तस्वीरों के जरिए हकीकत पर परदा डालने में सफल हुए जिम्मेदारों के लिए हालांकि लंबित परियोजनाओं को तय समय पर पूरा कराने की चुनौतियां अब भी कम नहीं। मुख्यमंत्री के तीसरे दौरे में भी शहर के लिए उनके निर्देशों के पूरा होने का इंतजार बना ही रह गया।
मुख्यमंत्री के यहां पहुंचने से पहले नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना और उनके दूत के रूप में प्रमुख राजस्व रजनीश दूबे ने विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया था। सूत्रों की मानें तो उनके जरिए सीएम को काशी के बारे में अच्छा फीडबैक मिला था।
शनिवार को हुई समीक्षा बैठक में भी सीएम के सामने अच्छी तस्वीर पेश की गई। नतीजा, उन्होंने जलकल, जलनिगम, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और पुलिस विभाग को एकबारगी फिर हिदायत देकर छोड़ दिया।
जबकि, सीएम पहली बार जब 27 मई को काशी आए थे। तब ही उन्होंने कमिश्नरी सभागार में करीब साढ़े तीन घंटे तक कानून व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा की थी। पेयजल, सड़क, सीवर, सफाई सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की खस्ताहाली पर जमकर फटकार लगाई थी।
अपराधियों के दस साल के रिकार्ड खंगालने, भू और वन माफिया पर कार्रवाई करने को कहा था। दूसरे दौरे में तो पेयजल योजना व वरुणा कॉरिडोर पर सिंचाई विभाग और जल निगम के अधिकारियों को उन्होंने दो टूक कहा कि काम में सुधार ले आएं नहीं तो पूरे स्टाफ को सस्पेंड कर दूंगा।
परियोजनाओं के लिए समयसीमा तय की लेकिन अधिकतर योजनाओं की समयावधि उसके बाद भी बार-बार बढ़ाई जा रही है। कोई काम समय से पूरा नहीं हो पा रहा है। बुनियादी सुविधाओं के लिए शहर परेशान है।