वाराणसी से गाजीपुर के लिए चलने वाली गाजीपुर डिपो की बस (यूपी 65 एफटी 0294) का बीमा फेल रहा। इस बस का 10 से अधिक बार चालान भी हो चुका है। जिसमें सबसे अधिक चालक द्वारा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर चालान किया गया है। इतनी बार चालान होने के बावजूद बस यात्रियों को लाने और ले जाने का काम कर रही है।
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केस-2
वाराणसी से गोपीगंज के रास्ते प्रयागराज जाने वाली ग्रामीण डिपो की बस (यूपी 63 टी 8078) का प्रदूषण सर्टिफिकेट बीते 27 सितंबर को एक्सपायर हो चुका है। यह बस 10 वर्ष से अधिक पुरानी है। इसका 6 वर्षों में 11 बार चालान किया जा चुका है। एक भी चालान की राशि जमा नहीं की गई है। इसमें सबसे अधिक बार चालान तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने पर हुआ है।
केस-3
वाराणसी से जौनपुर और सुल्तानपुर के रास्ते लखनऊ तक जाने वाली बस (यूपी 65 एफटी 1090) खटारा हो चुकी है। इस बस का बीमा काफी पहले ही एक्सपायर हो चुका है। इसका चार बार चालान भी हो चुका है। लेकिन एक भी राशि आरटीओ में जमा नहीं की गई है।
रोडवेज की बसों में गंदगी और दुर्व्यवस्था की भी भरमार है। कहीं पान की पीक तो कहीं पर गंदगी नजर आ रही है। इन बसों से प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिले में यात्रियों की सुविधा के लिए 623 बसें चलाई जा रही हैं। यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। बावजूद इसके, रोडवेज बसों में गंदगी बिखरी रहती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर कंडम बसों को हटवाया जाता है। 6 माह पहले 30 बसें हटाई गई थी। सरकारी बसों को बीमा की आवश्यकता नहीं है। -परशुराम पांडेय, क्षेत्रीय प्रबंधक