श्री काशी विश्वनाथ धाम से सटे दो जर्जर मकानों के गिरने की घटना के बाद पांच घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। पुलिस के अलावा अग्निशमन विभाग और एनडीआरएफ के 100 जवानों ने मलबे के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाल कर अस्पताल भिजवाया। करीब पांच घंटे बाद सुबह 8:30 बजे राहत और बचाव कार्य खत्म हुआ। संकरी गली में घनी बसावट वाला इलाका होने के कारण राहत और बचाव के काम में लगे जवानों को दिक्कत हुई।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि मंगलवार की भोर 3:09 बजे उन्हें हादसे की सूचना मिली। 15 मिनट में वह एक रेस्क्यू टेंडर और एक फायर टेंडर लेकर घटनास्थल पर पहुंच गए थे। रेस्क्यू टेंडर में कटर, स्प्रेडर, बोल्ट कटर और हैमर सहित अन्य उपकरण थे। 20 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर रेस्क्यू टीम को काम शुरू करना था।
ड़ी ही देर में एक और फायर टेंडर आया। सीढ़ी लगाकर अग्निशमन विभाग की 20 सदस्यीय टीम ने राहत और बचाव का काम शुरू किया। अग्निशमन विभाग के जवानों ने राहत और बचाव का काम शुरू किया तो उसके कुछ देर बाद 11 एनडीआरएफ के डीआईजी मनोज कुमार शर्मा अपने 60 जवानों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अग्निशमन और एनडीआरएफ के जवानों ने सघन खोज अभियान चलाकर जर्जर मकानों के मलबे के नीचे से 10 लोगों को बाहर निकाला। मलबे से निकाले गए लोगों में एक महिला की मौत हो गई, जबकि अन्य नौ का उपचार अस्पताल में चल रहा है।
रॉक्सी-चेरी ने किसी और के दबे न होने की पुष्टि की
अग्निशमन विभाग और एनडीआरएफ के जवानों ने 10 लोगों को अस्पताल भिजवाने के बाद तस्दीक कर ली कि मलबे के नीचे कोई और नहीं दबा है। इसके बाद एनडीआरएफ के स्वान दस्ते में शामिल रॉक्सी और चेरी ने चेक कर सुनिश्चित किया कि मलबे के नीचे कोई अन्य नहीं दबा है। रॉक्सी और चेरी जर्जर दोनों मकान के मलबे के कोने-कोने तक गए और उन्होंने जब पुष्टि की कि कोई और नहीं दबा है, तब जाकर खोज अभियान रोका गया।
सोमवार का दिन होता तो भयावह होती स्थिति
पुलिसकर्मियों का कहना था कि बाबा विश्वनाथ की बड़ी कृपा है कि सोमवार को हादसा नहीं हुआ। सावन के प्रत्येक सोमवार को विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन के लिए रविवार रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है। जिस गली के समीप दोनों जर्जर मकान गिरे हैं, उससे भी श्रद्धालु विश्वनाथ धाम में प्रवेश करते हैं।