गंगा के छोर पर बने इस दो मंजिला भवन मुमुक्षु भवन की शुरुआत अगस्त 2022 में हुई थी। तीन साल में अब तक पांच लोगों को मोक्ष मिला है। 2023 में चार और इस साल एक बुजुर्ग को मोक्ष मिला है। यहां 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए तीन महीने तक रहने का इंतजाम है। बुजुर्गों से दाखिले के पहले ही तीन महीने का बॉन्ड भरवाया जाता है। यहां पर रहने वाले बुजुर्गों की सावन के बाद स्क्रूटनी की जाएगी। इसमें से जिनका तीन महीने का समय पूरा हो चुका है, उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।
इन बुजुर्गों को तारा संस्था के रायपुर और राजस्थान सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में संचालित केंद्रों में भेज दिया जाता है। जिस बुजुर्ग की स्थिति ज्यादा नाजुक होती है, उनको अंतिम समय तक रहने दिया जाता है। यहां अशक्त बुजुर्गों के लिए मेडिकल बेड लगाए गए हैं और परिसर में ही चिकित्सक रहता है और नियमित स्वास्थ्य जांच की जाती है। उनके लिए केयर टेकर का भी इंतजाम है।