वीडीए का कहना है कि उस्ताद के घर को धरोहर में शामिल करने के लिए कवायद की गई थी लेकिन आज तक तो कोई सरकारी नुमाइंदा झांकने नहीं आया। मकान टूटने की खबर मिली तो काम रोकने के लिए लोग पहुंच गए थे। जर्जर मकान को दुरुस्त किया जा रहा था और घर वालों ने ही गलत अफवाह फैला दी।
उस्ताद के पौत्र राजी अहमद ने कहा कि घर की आपसी कलह के कारण यह सारा मामला सड़क पर आया गया है। दादा जी का कद इतना बड़ा है कि उनके नाम से हम सभी जाने जाते हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है। जर्जर हो चुके मकान को दुरुस्त किया जा रहा था तो परिवार के लोगों ने ही उसका दुष्प्रचार किया।