कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो धरातल पर बेअसर साबित हो रही हैं। कालीन नगरी भदोही में कुपोषण की काली छाया मासूमों की जिंदगी तबाह कर रही है। 33 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि सरकार की तमाम योजनाएं और अभियान चलने के बाद भी कुपोषण की समस्या गंभीर होती जा रही है।
यही वजह है कि साल दर साल कुपोषित बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है। पिछले दो वर्ष में कुपोषित बच्चों की संख्या छह हजार बढ़ गई है। प्रशासन के ये आंकड़े योजनाओं और संबंधित विभागों की कार्यशैली की पोल खोलने के लिए काफी हैं। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से मासूमों की सेहत सुधारने की कवायद हो रही है लेकिन भ्रष्टाचार के चलते योजनाएं फलीभूत नहीं हो पा रही।
बच्चों और धात्री महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये पोषाहार देने, समय-समय जांच और उपचार के सख्त निर्देश के बावजूद अफसरों व कर्मचारियों की मनमानी भारी पड़ रही है। जून 2018 के सर्वे के अनुसार भदोही जिले में पांच वर्ष तक के 33055 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें 8500 बच्चे अतिकुपोषित और 24604 बच्चे कुपोषित श्रेणी में हैं।
जिला प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे में कुपोषण की भयावह तस्वीर ने हैरत में डाल दिया है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में चिह्नित किए गए शून्य से पांच वर्ष तक के कुल 171636 बच्चों में से 21 फीसदी से अधिक कुपोषण से जूझ रहे हैं। तमाम प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद कालीन नगरी को कुपोषण के डंक से मुक्ति मिलती नहीं दिख रही। कुपोषण के मामले में सबसे खराब हालत भदोही नगर की है।
भदोही नगर में कुपोषित बच्चों की 5774 है, जबकि अति कुपोषित बच्चे 2474 हैं। कुल मिलाकर यहां 8248 बच्चे कुपोषण की जद में हैं। इसी तरह औराई, डीघ और ज्ञानपुर ब्लॉकों में भी कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों का आंकड़ा चिंतित करने वाला है। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी उर्मिला देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और धात्री महिलाओं को पोषाहार दिया जाता है। कुछ केंद्रों पर गड़बड़ी की सूचनाएं मिली, जिनकी जांच कराई जा रही है।