फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी के इस जिले में कुपोषण से जूझ रहे 33 हजार मासूम, साल दर साल बढ़ रही संख्या 

Mon, 13 Aug 2018 07:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही
विज्ञापन
demo pic
विज्ञापन
कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो धरातल पर बेअसर साबित हो रही हैं। कालीन नगरी भदोही में कुपोषण की काली छाया मासूमों की जिंदगी तबाह कर रही है। 33 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि सरकार की तमाम योजनाएं और अभियान चलने के बाद भी कुपोषण की समस्या गंभीर होती जा रही है।
विज्ञापन


यही वजह है कि साल दर साल कुपोषित बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है। पिछले दो वर्ष में कुपोषित बच्चों की संख्या छह हजार बढ़ गई है। प्रशासन के ये आंकड़े योजनाओं और संबंधित विभागों की कार्यशैली की पोल खोलने के लिए काफी हैं। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से मासूमों की सेहत सुधारने की कवायद हो रही है लेकिन भ्रष्टाचार के चलते योजनाएं फलीभूत नहीं हो पा रही।

बच्चों और धात्री महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये पोषाहार देने, समय-समय जांच और उपचार के सख्त निर्देश के बावजूद अफसरों व कर्मचारियों की मनमानी भारी पड़ रही है। जून 2018 के सर्वे के अनुसार भदोही जिले में पांच वर्ष तक के 33055 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें 8500 बच्चे अतिकुपोषित और 24604 बच्चे कुपोषित श्रेणी में हैं।
विज्ञापन


जिला प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे में कुपोषण की भयावह तस्वीर ने हैरत में डाल दिया है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में चिह्नित किए गए शून्य से पांच वर्ष तक के कुल 171636 बच्चों में से 21 फीसदी से अधिक कुपोषण से जूझ रहे हैं। तमाम प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद कालीन नगरी को कुपोषण के डंक से मुक्ति मिलती नहीं दिख रही। कुपोषण के मामले में सबसे खराब हालत भदोही नगर की है।

भदोही नगर में कुपोषित बच्चों की 5774 है, जबकि अति कुपोषित बच्चे 2474 हैं। कुल मिलाकर यहां 8248 बच्चे कुपोषण की जद में हैं। इसी तरह औराई, डीघ और ज्ञानपुर ब्लॉकों में भी कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों का आंकड़ा चिंतित करने वाला है। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी उर्मिला देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और धात्री महिलाओं को पोषाहार दिया जाता है। कुछ केंद्रों पर गड़बड़ी की सूचनाएं मिली, जिनकी जांच कराई जा रही है।
विज्ञापन

मां की सेहत का भी असर

demo pic
डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि मां के स्वास्थ्य असर उनके बच्चों पर भी पड़ता है। गर्भवती और धात्री महिलाओं का खान-पान सही न होने से बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। हमारे समाज में गर्भवती महिलाएं अपने खान-पान पर खास ध्यान नहीं देतीं, जो घातक साबित होता है। ऐसी महिलाओं को पोषणयुक्त सब्जियां, फल और दूध आदि का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए।  

आंकड़े एक नजर में
वर्ष       कुपोषित बच्चों की संख्या  
2016       27,325  
2017       31,400  
2018       33,055 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें