फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: एक ग्राम पंचायत, पांच रेलवे स्टेशन, चार पर नहीं रुकतीं रेल गाड़ियां; एक छोर से दूसरे छोर की दूरी 35KM है

Wed, 14 Oct 2026 03:32 PM IST
Sharukh Khan सुरेंद्र सिंह, अमर उजाला, सोनभद्र

सार

यूपी के सोनभद्र जिले की एक ग्राम पंचायत ऐसी है, जहां पांच रेलवे स्टेशन हैं, लेकिन चार पर ट्रेनों का ठहराव नहीं होता है। 64 टोलों में फैली पनारी ग्राम पंचायत के एक छोर से दूसरे छोर की दूरी करीब 35 किलोमीटर है।
विज्ञापन
panari gram panchayat - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एक ग्राम पंचायत में पांच रेलवे स्टेशन...यह सुनकर हर किसी का चौंकना लाजिमी है। यूपी के सोनभद्र जिले की पनारी ग्राम पंचायत के अलग-अलग पांच टोलों में रेलवे स्टेशन हैं। कुल 64 टोलों में बंटे इस गांव के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए 35 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। 
विज्ञापन


ऐसे में ग्रामीणों के लिए रेल नेटवर्क ही सहारा था लेकिन कोरोना काल के बाद से ओबरा डैम रेलवे स्टेशन को छोड़कर चार अन्य स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव नहीं होता है। ऐसे में ग्रामीणों को चोपन रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है।

चोपन विकास खंड की पनारी ग्राम पंचायत क्षेत्रफल और आबादी के मामले में कई नगर पंचायतों और कस्बों को भी पीछे छोड़ती है। स्थानीय प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, जुगैल के बाद यह जिले की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाली पंचायत है। 
विज्ञापन
Trending Videos

पनारी की कुल आबादी लगभग 35000 है, जिसमें तकरीबन 21000 मतदाता हैं। पूर्व मध्य रेलवे धनबाद मंडल के चुनार-चोपन और चोपन-सिंगरौली/गढ़वा रेल रूट पनारी गांव के अलग-अलग टोलों से होकर गुजरता है।
 

ग्राम पंचायत के दायरे में सलईबनवा, गुरमुरा, फफराकुंड, ओबरा बिजली परियोजना के नजदीक स्थित ओबरा डैम और परसोई ग्राम पंचायत की सीमा पर स्थित मगरदहा रेलवे स्टेशन हैं। 

सुविधा और चुनौतियां एक साथ
एक ही ग्राम पंचायत में पांच रेलवे स्टेशन होना गर्व की बात जरूर है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर ओबरा डैम रेलवे स्टेशन को छोड़ दिया जाए तो किसी भी स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव नहीं होता है। 

 

कोविड काल से पहले इन स्टेशनों पर कुछ पैसेंजर ट्रेनें रुकती थीं, जो यहां के आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों के लिए मददगार थीं। मौजूदा समय में ठहराव न होने के कारण छोटी और लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए ग्रामीणों को चोपन मुख्य जंक्शन का रुख करना पड़ता है। 64 टोलों में बंटे गांव में पक्की सड़कों और परिवहन के साधनों की कमी है।

ग्राम पंचायत में पांच रेलवे स्टेशन होना गर्व की बात है लेकिन इन स्टेशनों पर एक भी सवारी गाड़ी का स्टॉपेज नहीं होने से यहां की बड़ी आबादी को इसका प्रत्यक्ष रूप से लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई बार उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया जा चुका है लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हमारे कार्यकाल में बहुत काम हुए हैं लेकिन अभी भी ग्राम पंचायत राजनीतिक एवं प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेल रही है। - तारा देवी, ग्राम प्रधान पनारी।

 

कोविड काल से पहले चोपन से कटनी तक एक पैसेंजर ट्रेन चलती थी। इसका ठहराव इन सभी स्टेशनों पर होता था। इससे लोगों को आवागमन की सहूलियत थी। ट्रेन का संचालन बंद होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। पैसेंजर ट्रेन के संचालन के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है। - हरदेव नारायण तिवारी, संयोजक आदिवासी विकास मंच।

 

ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चलाया जा रहा है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है जिससे रहवासियों को आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। -राजाराम भारती, आदिवासी नेता।

 
विज्ञापन

रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी को लेकर रेलवे की ओर से लगातार काम किए जा रहे हैं। ट्रेनों के ठहराव का निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाता है। - ललित पासवान, पीआरआई, पूर्व मध्य रेलवे धनबाद मंडल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें