भाजपा ने वर्ष 2023 में उन्हें विधान परिषद भेजकर पहले ही बड़ा राजनीतिक संकेत दे दिया था। अब संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें शामिल किए जाने को गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को और मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्वांचल में सामाजिक समीकरण साधने के लिहाज से यह फैसला भाजपा के लिए अहम हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी की हर राजनीतिक नियुक्ति का असर प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति तक देखा जाता है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी हंसराज विश्वकर्मा संगठन, बूथ प्रबंधन और सामाजिक समीकरण साधने में सक्रिय भूमिका में रहे थे।
वर्तमान में वाराणसी से भाजपा के तीन मंत्री योगी सरकार में शामिल हैं। इनमें दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ आयुष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। रविंद्र जायसवाल स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं, जबकि अनिल राजभर श्रम एवं सेवायोजन समन्वय विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं। हंसराज विश्वकर्मा के संभावित मंत्री बनने से काशी की राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रभाव दोनों बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।