केस - 1 : सिगरा के विकास सिंह को कान में इंफेक्शन था। उन्हें दो दिनों से सुनने में समस्या थी। शनिवार को वह 12:35 पर डॉक्टर को दिखाने पहुंचे तो नेहा वर्मा ने कहा कि अब समय समाप्त हो गया है, समय से आया करो। उन्होंने मरीज की पूरी समस्या सुने बिना ही पर्चे पर बी-कॉम्प्लेक्स, ओमेप्राजोल, लिवोसेट्रिजिन समेत चार दवाइयां लिख दी।
केस - 2 : गोदौलिया के अंकित यादव का एलर्जी की समस्या थी। ओपीडी में वह 12:50 पर डॉक्टर को दिखाने पहुंचे तो चैम्बर का गेट खुला था, लेकिन चिकित्सक नहीं मौजूद थीं। एसआईसी से बात करने पर वापस आईं तो कहा कि जरा जरा सी बात पर तुमलोग शिकायत करने पहुंच जाते हो। उन्होंने बिना समस्या जाने ही चैम्बर के बाहर ही खड़े होकर दो दवा लिवोसेट्रिजिन और बी कॉम्प्लेक्स लिख दिया। कहा कि दवा लिख दे रही हूं नहीं, तो तुमलोग जाकर शिकायत कर देते हो।
निजी मेडिकल संभालता है स्किन विभाग की जिम्मेदारी
दो केस केवल नाम मात्र के हैं। अस्पताल में अधिकतर डॉक्टर के चैंबर एक घंटे पहले ही बंद हो जाते हैं। बाल विभाग से लेकर स्किन और ईएनटी सभी का यही हाल है। स्किन विभाग में चैंबर संभालने की जिम्मेदारी एक निजी मेडिकल संचालक का भाई संभालता है। मरीजों ने बताया कि स्किन के डॉक्टर उक्त मेडिकल स्टोर की दवाएं लिखते हैं, जिसके कारण संचालक चिकित्सक की सेवा में लगा रहता है। चिकित्सक के चले जाने पर वही चैंबर को बंद करने के साथ सब कुछ व्यवस्थित करने की भी जिम्मेदारी संभालता है।
मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना हमारी प्राथमिकता है। ओपीडी का समय दोपहर 2 बजे तक का है। जिन डॉक्टरों ने समय से पहले अपने चैंबर समय से पहले बंद कर दिए, उनसे जवाब तलब किया जाएगा। मरीजों से अभद्रता करने वाली चिकित्सक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। - डॉ. बृजेश कुमार, एसआईसी।
अस्पताल में मरीजों से अभद्रता करने के मामले की जांच की जाएगी। मरीजों से सहूलियत से पेश आना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। ओपीडी से डॉक्टर एक घंटे पहले क्यों चले गए, इस संबंध में एसआईसी से जवाब तलब किया जाएगा। - डॉ. एनडी शर्मा, अपर निदेशक, स्वास्थ्य विभाग।