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Kabirchaura Hospital: एक घंटे पहले बंद हो गई ओपीडी, बिना इलाज लौटे 200 मरीज; धूप में हुई परेशानी

Sun, 10 May 2026 01:23 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी के मंडलीय अस्पताल में बिना सूचना ओपीडी एक घंटे पहले बंद होने से करीब 200 मरीज इलाज कराए बिना लौट गए। ईएनटी और स्किन विभाग समेत कई चैंबर समय से पहले बंद मिले। मरीजों ने डॉक्टरों पर अभद्रता और लापरवाही के आरोप लगाए। एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार ने मामले में जांच और संबंधित डॉक्टरों से जवाब तलब करने की बात कही।
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मंडलीय अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों की भीड़। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Kabirchaura Haospital Varanasi: मंडलीय अस्पताल में शनिवार को बिना किसी पूर्व सूचना के ओपीडी एक घंटे पहले बंद कर दी गई। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने किसी प्रकार की सूचना नहीं दी थी। नतीजन ओपीडी में रजिस्ट्रेशन के बाद तकरीबन 200 मरीज वापस लौटे। 

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मंडलीय अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को इलाज के लिए 1000 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन ईएनटी समेत स्किन और तमाम विभागों के चैम्बर एक बजे ही बंद हो गए। जिसके कारण दूर दराज से आए मरीज निराश ही लौटे। कई ऐसे भी थे, जिन्होंने प्राइवेट अस्पतालों में जाकर अपना इलाज कराया। 

मरीजों का कहना था कि बिना किसी त्योहार अथवा आयोजन के ही अस्पताल की ओपीडी एक घंटे पहले बंद कर दी गई। इसके लिए न तो कोई नोटिस चस्पा की गई और न ही किसी प्रकार की कोई सूचना रजिस्ट्रेशन काउंटर पर दी गई। इसी बीच अस्पताल में आए मरीजों और उनके तीमारदारों से ईएनटी सर्जन डॉ. नेहा वर्मा ने बदसलूकी की। जबकि सभी मरीज ओपीडी के समय में ही इलाज कराने पहुंचे थे। 

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केस - 1 : सिगरा के विकास सिंह को कान में इंफेक्शन था। उन्हें दो दिनों से सुनने में समस्या थी। शनिवार को वह 12:35 पर डॉक्टर को दिखाने पहुंचे तो नेहा वर्मा ने कहा कि अब समय समाप्त हो गया है, समय से आया करो। उन्होंने मरीज की पूरी समस्या सुने बिना ही पर्चे पर बी-कॉम्प्लेक्स, ओमेप्राजोल, लिवोसेट्रिजिन समेत चार दवाइयां लिख दी।

केस - 2 : गोदौलिया के अंकित यादव का एलर्जी की समस्या थी। ओपीडी में वह 12:50 पर डॉक्टर को दिखाने पहुंचे तो चैम्बर का गेट खुला था, लेकिन चिकित्सक नहीं मौजूद थीं। एसआईसी से बात करने पर वापस आईं तो कहा कि जरा जरा सी बात पर तुमलोग शिकायत करने पहुंच जाते हो। उन्होंने बिना समस्या जाने ही चैम्बर के बाहर ही खड़े होकर दो दवा लिवोसेट्रिजिन और बी कॉम्प्लेक्स लिख दिया। कहा कि दवा लिख दे रही हूं नहीं, तो तुमलोग जाकर शिकायत कर देते हो। 

निजी मेडिकल संभालता है स्किन विभाग की जिम्मेदारी
दो केस केवल नाम मात्र के हैं। अस्पताल में अधिकतर डॉक्टर के चैंबर एक घंटे पहले ही बंद हो जाते हैं। बाल विभाग से लेकर स्किन और ईएनटी सभी का यही हाल है। स्किन विभाग में चैंबर संभालने की जिम्मेदारी एक निजी मेडिकल संचालक का भाई संभालता है। मरीजों ने बताया कि स्किन के डॉक्टर उक्त मेडिकल स्टोर की दवाएं लिखते हैं, जिसके कारण संचालक चिकित्सक की सेवा में लगा रहता है। चिकित्सक के चले जाने पर वही चैंबर को बंद करने के साथ सब कुछ व्यवस्थित करने की भी जिम्मेदारी संभालता है। 

मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना हमारी प्राथमिकता है। ओपीडी का समय दोपहर 2 बजे तक का है। जिन डॉक्टरों ने समय से पहले अपने चैंबर समय से पहले बंद कर दिए, उनसे जवाब तलब किया जाएगा। मरीजों से अभद्रता करने वाली चिकित्सक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। - डॉ. बृजेश कुमार, एसआईसी।  
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अस्पताल में मरीजों से अभद्रता करने के मामले की जांच की जाएगी। मरीजों से सहूलियत से पेश आना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। ओपीडी से डॉक्टर एक घंटे पहले क्यों चले गए, इस संबंध में एसआईसी से जवाब तलब किया जाएगा। - डॉ. एनडी शर्मा, अपर निदेशक, स्वास्थ्य विभाग।
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