पार्टी ने दावा किया था वह पिछले साल के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन सारे दावे हवा-हवाई हो गए। जिन वार्ड में जीत मिली है, वह मुस्लिम बहुल इलाके हैं। कांग्रेस ने लल्लापुरा खुर्द, डिठोरी महाल, काजी सादुल्लापुरा, कमलगढ़हा, सरैया, कमालपुरा, मदनपुरा और जलालीपुरा में जीत दर्ज की है। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे का कहना है कि यह हमारे लिए आत्ममंथन का समय है।
वाराणसी भाजपा में जश्न
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नगर निगम के पार्षदों के चुनाव में भाजपा को 23 सीटों का फायदा हुआ है। 2017 में पार्टी के 40 पार्षद चुनाव जीते थे। इस बार यह संख्या 63 पहुंच गई है। कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के 21 पार्षद चुनाव जीतकर आए, लेकिन इस बार आठ पार्षद प्रत्याशी ही चुनाव जीत सके हैं। इसका मतलब है कि 13 सीटों का नुकसान हुआ है।
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सपा को भी एक सीट का नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार 13 पार्षद प्रत्याशी चुनाव जीत पाए हैं। यह संख्या पिछली बार 14 थी। बसपा को पिछली बार दो सीटें मिलीं थीं, लेकिन इस बार खाता नहीं खुल सका। निर्दलीय पार्षदों की संख्या दो बढ़ी है। पिछली बार 13 पार्षद चुनाव जीते थे, लेकिन इस बार 15 चुनाव जीतकर आए हैं। एक सीट जन अधिकार पार्टी के खाते में गई है।
वाराणसी में मेयर सीट पर भाजपा के अशोक तिवारी की जीत
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वाराणसी नगर निगम चुनाव में बागी उम्मीदवारों ने भी कई वार्डों में पार्टियों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। जनता ने भी बागियों पर अपना भरोसा जताया और उनके सिर पर जीत का ताज पहनाया। भाजपा और कांग्रेस को कई वार्डों में बागियों का विरोध झेलना पड़ा। भाजपा के दो बागियों ने तो कांग्रेस के एक बागी उम्मीदवार ने अपनी जीत दर्ज की है। नगर निगम की स्थिति को देखें तो सपा, कांग्रेस और बसपा से अधिक निर्दल उम्मीदवारों की संख्या है। सदन में 15 निर्दलीय उम्मीदवार इस बार पहुंचे हैं।
कालभैरव वार्ड से भाजपा के बागी संजय गुजराती विश्वंभरी और नगवां से माधुरी सिंह ने निर्दल प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत दर्ज की है। माधुरी सिंह के पति रविंद्र सिंह भाजपा के पार्षद थे। वहीं कांग्रेस के बागी पार्षद तुफैल अंसारी की पत्नी ताज्बर बीबी ने भी बतौर निर्दल प्रत्याशी जीत दर्ज की है। बागी प्रत्याशियों ने अपना टिकट कटने से नाराज होकर निर्दल प्रत्याशी के तौर पर नगर निगम चुनाव में अपनी दावेदारी पेश की। जनता ने भी प्रत्याशियों पर अपना भरोसा जताया और उन्हें विजयश्री का आशीर्वाद भी दिया।
मतदान से ठीक पहले पार्टी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किए गए पूर्व डिप्टी मेयर संजय राय के भाई प्रवीण राय ने भी काजीपुरा वार्ड से जीत दर्ज की है। निर्दल प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने के चलते पूर्व डिप्टी मेयर के साथ ही उनके भाई को भी छह वर्ष के निष्कासित किया गया था। हालांकि जीत के बाद प्रवीण राय ने कहा कि मेरा तो घर भाजपा है। कुछ लोगों ने षडयंत्र किया है, मगर मेरी जीत ने सबकुछ साफ कर दिया है।