पुलिस की पूछताछ में मनोज और सुनील ने बताया कि वह चाचा के साथ जबलपुर में रहकर पढ़ाई करते थे। चाचा ने दूसरी शादी की तो हम दोनों को हटा दिया। इसके बाद गुजरात चले गए। वहां काम में मन नहीं लगा और दोस्तों के साथ बैंक लूटने की योजना पर काम करने लगे। चूंकि जबलपुर में अधिक समय तक रहे थे तो वहां की स्थित से वाकिफ थे। घटना को अंजाम देने से पूर्व 20 दिनों तक बाइक से विभिन्न बैंकों की रेकी की थी।
रोहनिया थाना प्रभारी के अनुसार दोनों भाइयों ने वारदात के बाद मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया। घटना को अंजाम देने के बाद लूट के रुपये लेकर दोनों बाईपास पर पहुंचे और एक जगह पर रुपये छुपा दिया। इसके बाद ऑटो से किराये के कमरे पर आ गए। वहीं दोनों ने बाल भी छोटा करा लिया ताकि पहचान में न आ सके। अगले दिन दोनों भाई बाइक से रुपये भरी पेटी लेकर रोहनिया आ गए।