इन बकायेदार फर्मों की लंबी सूची को चिन्हित करते हुए राज्य कर विभाग ने 29 विशेष टीमों का गठन किया है, जो विभिन्न जिलों में इन फर्मों का पता लगाने और कार्रवाई करने में जुटी हैं। टीमें न केवल रजिस्टर्ड स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं, बल्कि मोबाइल लोकेशन, बैंक खातों, कर रिटर्न और पुराने कारोबारी नेटवर्क के आधार पर भी मालिकों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
507 फर्मों की चल और अचल संपत्ति कुर्क
विभाग की कार्रवाई का असर अब दिखाई देने लगा है। नवंबर महीने में अब तक कुल 507 फर्मों के प्रोपराइटर की चल और अचल संपत्तियों की कुर्की की जा चुकी है। कुर्क की गई संपत्तियों में जमीन, वाहन, मशीनरी और बैंक खातों पर रोक शामिल है। इन कार्रवाइयों के बाद विभाग ने 27.56 करोड़ रुपये की वसूली भी की है।
विभाग ने 26 फर्मों और उनके प्रोपराइटरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। जांच में पाया गया कि इनमें से अधिकतर कंपनियां ऐसे व्यक्तियों के नाम पर बनाई गई थीं, जिनका वास्तविक कारोबार से कोई संबंध नहीं था। कई फर्मों के मालिकों के नाम, पते और पहचान संबंधी दस्तावेज भी फर्जी पाए गए, जिससे स्पष्ट हुआ कि पूरा नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था।
कर अधिवक्ताओं का कहना है कि इस प्रकार के व्यापारी अक्सर अपने कर्मचारियों, नौकरों या रिश्तेदारों के नाम पर काल्पनिक फर्में रजिस्टर करा लेते हैं। इन फर्मों का उपयोग बाद में मनगढंत बिल जारी करने के लिए किया जाता है।
इन बिलों के आधार पर जीएसटी जमा करने की औपचारिकता निभाने के लिए कभी-कभी थोड़ा-बहुत कर जमा कर रिटर्न दाखिल कर दिया जाता है, ताकि फर्म सक्रिय बनी रहे। लेकिन वास्तविक उद्देश्य इन बोगस बिलों का इस्तेमाल कर इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करना होता है, जिसके जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जाती है।
क्या बोले अधिकारी
प्रमुख सचिव के निर्देश पर बकाया जीएसटी वसूली की कार्यवाही चल रही है। टैक्स न जमा करने वालों की चल और अचल संपत्तियों की कुर्की की जा रही है। जांच टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। -मिथिलेश शुक्ला, अपर आयुक्त, जोन-प्रथम, राज्य कर विभाग