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UP Board : फर्जी परीक्षक पकड़ाए..., कॉलेज के चपरासी ने रची थी साजिश; हैरान कर देगा ये शातिर अंदाज

Fri, 07 Feb 2025 03:43 AM IST
अमन विश्वकर्मा रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

यूपी बोर्ड की परीक्षा के प्रैक्टिकल में गुरुवार को डीएवी इंटर कॉलेज में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जीव विज्ञान के छात्रों का प्रैक्टिकल लेने के लिए जिस परीक्षक की ड्यूटी लगाई गई थी, वह तो नहीं आए, लेकिन उनकी जगह तीन अन्य लोग परीक्षा लेने पहुंच गए।
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फर्जी परीक्षक सहित तीन गिरफ्तार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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UP Board Exam 2025 : लिखित परीक्षाओं में दूसरे के नाम पर परीक्षा देते परीक्षार्थियों के पकड़े जाने की घटनाएं तो होती है, लेकिन प्रैक्टिकल लेने वाले परीक्षक की जगह कोई दूसरा आए, ऐसा जल्दी नहीं होता है। डीएवी इंटर कॉलेज में गुरुवार को हुई घटना में फर्जीवाड़ा करने वाले तीनों लोग पुलिस की गिरफ्त में तो हैं। 

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जिस विद्यालय के शिक्षक को डीएवी इंटर कॉलेज में प्रैक्टिकल लेने आना था, उन्हीं का आधार कार्ड और उसी विद्यालय के प्रधानाचार्य के मोहर को तीनों ने फर्जीवाड़े का हथियार बनाया। ताकि किसी को शक न हो। 

यह भी पढ़ें- प्रैक्टिकल में फर्जीवाड़ा, वाराणसी में परीक्षक बनकर पहुंचे तीन युवक धरे गए; ऐसे हुआ था शक
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डीएवी इंटर कॉलेज में एनडीएस केजी इंटर कॉलेज उकछी बलिया के राजीव कुमार शर्मा को परीक्षक बनाया गया था। गुरुवार को उनकी जगह गाजीपुर के मानपुर टिकरी निवासी अजीत यादव परीक्षक बनकर पहुंच गया। 

इनके साथ गाजीपुर के भौराहा निवासी ध्रुव यादव और बलिया के उकछी निवासी अमरेंद्र कुमार तिवारी भी आए। पूछताछ में पता चला कि मास्टरमाइंड अमरेंद्र तिवारी है, जो उकछी के कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। इसी ने पूरी साजिश रची। फर्जी परीक्षक और एक अन्य के साथ गाजीपुर से ही किराए की कार बुक कर तीनों डीएवी इंटर कॉलेज पहुंचे।

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दो निजी विद्यालय में पढ़ाते हैं, एक है चपरासी
पूछताछ में पता चला कि बलिया निवासी अजीत और गाजीपुर निवासी ध्रुव निजी विद्यालय में पढ़ाते हैं। जबकि अमरेंद्र चपरासी है। प्रधानाचार्य ने डीआईओएस को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें कहा गया है कि डीएवी इंटर कॉलेज में जीव विज्ञान प्रवक्ता राजीव दूबे की सूझ-बूझ से मामला पकड़ में आया।

छात्रों से सवाल पूछने पर हुआ संदेह तो हुआ खुलासा
अजीत ने जीव विज्ञान के छात्रों से सवाल पूछना शुरू किया। कुछ छात्रों को उनके सवाल पूछने का तरीका अलग लगा। उन्होंने बिना कुछ कहे विद्यालय के प्रधानाचार्य को जानकारी दी। प्रधानाचार्य ने विद्यालय में जीव विज्ञान के प्रवक्ता राजीव दूबे को छात्रों से बातचीत कर समाधान करवाने कहा। 

राजीव दूबे ने बातचीत शुरू की तो उन्हें भी शक हुआ। उन्होंने बलिया के मूल परीक्षक के नंबर पर बात की तो पता चला कि वह तो आए ही नहीं हैं। इसके बाद तीनों को कमरे में बिठाया गया। फिर पुलिस को बुलाया गया।
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