उसका काम चाय की दुकान पर बैठे-बैठे हो जाता था। विधायक बनने के बाद भी पिताजी में कोई अहंकार नहीं रहता था। वे किसी की साइकिल या मोटरसाइकिल से कहीं भी चले जाते थे। उन्हें अगर पता चल जाता कि उनके विधानसभा में किसी के घर कोई समस्या है। वह बिना बुलाए चले जाते थे। उसकी समस्या सुनते थे और उसका निदान कराते थे।
उन्होंने बताया कि आपातकाल के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का जहां देश में सूपड़ा साफ हो गया था। यूपी की सियासत में बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस आई के लिए 1980 का चुनाव बेहद उत्साहजनक रहा। एक तरफ जहां प्रदेश में 309 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। वहीं जनता पार्टी के विघटन और जनसंघ के बाद भाजपा के गठन के बाद वाराणसी में भी पांच सीटों पर कांग्रेस आई को जीत मिली थी।
1980 में विधानसभा सीटों के परिणाम
- कैंट विधानसभा सीट से कांग्रेस आई के मांडवी प्रसाद सिंह ने जनता पार्टी सेक्युलर के शतरुद्र प्रकाश को 5616 वोटों से हराया था।
- दक्षिणी विधानसभा सीट से कांग्रेस आई के कैलाश टंडन ने भाजपा के राजबली तिवारी को 5751 वोटों से हराया था
- उत्तरी विधानसभा सीट से कांग्रेस आई के मोहम्मद शफीकुर्रहमान अंसारी ने भाजपा के शफुल्ला अंसारी को 1212 वोटों से हराया था।
- चिरईगांव विधानसभा सीट से कांग्रेस आई के श्रीनाथ सिंह ने कांग्रेस यू के खरबन को फाइव 568 वोटों से हराया था।
- कोलअसला विधानसभा सीट से सीपीआई के उदल ने कांग्रेस के गिरिजेश वल्लभ को 7147 वोटों से हराया था।
- गंगापुर विधानसभा सीट से कांग्रेस आई की धनेश्वरी देवी ने सीपीएम के राजकिशोर को 813 वोटों से हराया था।
- इनके अलावा सैदपुर से रामकरण, धानापुर से रामजनम, चंदौली सुरक्षित से संकटा प्रसाद शास्त्री, चकिया सुरक्षित से खरपतराम, मुगलसराय से रामचंद्र, औराई से योगेंद्र चंद्र, ज्ञानपुर से बृद्धि नारायण, भदोही सुरक्षित से भंवरी राम विधायक बने थे। अब ये सीटें गाजीपुर चंदौली और भदोही में चली गई हैं।
(नोट: सभी आंकड़े चुनाव आयोग के अनुसार )