बसपा को अपनी सोशल इंजीनियरिंग से उम्मीद है। वाराणसी की आठों विधानसभा सीट पर मौर्य, ब्राह्मण, पटेल उम्मीदवारों के जरिए जातीय समीकरण साधने में है। वर्ष 2012 में बसपा यहां बेहतर प्रदर्शन कर चुकी है।
कांग्रेस
कांग्रेस ने आठ विधानसभा सीटों में चार पर महिला प्रत्याशी उतारकर अपने लड़की हूं, लड़ सकती हूं अभियान को धार देने की कोशिश की है। इसके अलावा कांग्रेस को अपने दिग्गजों से भी चमत्कार की उम्मीद है। कांग्रेस भी जातीय समीकरण से उम्मीद लगाए बैठी है।
देर रात तक चलता रहा बैठकों का दौर
विधानसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में सोमवार को मतदान होना है। अधिक से अधिक लोग अपने घरों से निकलकर बूथों तक पहुंचें, इसको लेकर प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ रणनीति बनाने में लगे रहे। देर रात पार्टियों के चुनाव कार्यालय पर बैठकों का दौर भी चलता रहा, जिसमें पोलिंग एजेंट बनाए जाने सहित अन्य तैयारियों की समीक्षा भी हुई।
वाराणसी जिले की आठ विधानसभा सीटों में इस बार भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस, आप सहित अन्य राजनीतिक दलाें को मिलाकर 70 से अधिक प्रत्याशी हैं। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार शनिवार शाम से ही चुनाव प्रचार थम गया है। ऐसे में रविवार को दिन में प्रत्याशी अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में कालोनियों, गांवों में घर-घर पहुंचे। प्रत्याशियों ने लोगों से विकास कराए जाने के बात कहकर उनका आशीर्वाद भी मांगा।
सोशल मीडिया को बनाया मुख्य आधार
चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने रविवार को दिन में घर घर लोगों से जनसंपर्क किया और सोशल मीडिया को भी मुख्य आधार बनाया गया। प्रत्याशियों के समर्थक फेसबुक पर अलग-अलग पोस्ट डालकर लोगों से वोट की अपील करते रहे।