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अनोखी पहलः अब नहीं जान सकेंगे बीएचयू में महिला शिक्षकों की वैवाहिक स्थिति, एमएमवी की असिस्टेंट प्रोफेसर ने की थी मांग

Thu, 02 Sep 2021 08:02 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बीएचयू में तैनात महिला शिक्षकों के नाम के आगे अब सुश्री या श्रीमती जैसे शब्द लिखे नहीं जाएंगे। अब केवल उनकी पहचान पद से ही होगी। माना जा रहा है कि यह पहल देश में पहली बार किसी विश्वविद्यालय में हुई है। 
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बीएचयू में महिला शिक्षकों के नाम से हटा वैवाहिक स्टेटस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू)  में महिला शिक्षकों के पद नाम से पहले वैवाहिक स्टेटस से जुड़े शब्द नहीं लिखे जाएंगे। इससे पहले जहां पदनाम से पहले सुश्री, श्रीमती जैसे शब्द लिखे जाते थे, वहीं अब केवल उनकी पहचान पद से ही होगी। महिला महाविद्यालय की मांग पर बीएचयू प्रशासन ने यह फैसला न केवल लिया है, बल्कि महाविद्यालय की वरिष्ठता सूची जारी करते हुए इसे लागू भी कर दिया है। माना जा रहा है कि यह पहल देश में पहली बार किसी विश्वविद्यालय में हुई है।

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महिला महाविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रतिमा गोंड ने नौ अक्तूबर 2020 को कुलपति को भेजे ईमेल में यह बताया था कि बीएचयू में किए जाने वाले पत्राचारों में पुरुष शैक्षणिक स्टाफ के नाम के आगे केवल डॉक्टर या प्रोफेसर लिखा जाता है। उनकी वैवाहिक स्थिति का कोई जिक्र नहीं होता है।

दूसरी तरफ महिला शैक्षणिक स्टाफ के नाम में डॉक्टर लिखने के बाद सुश्री या श्रीमती लिखा जाता है। डॉ. प्रतिमा गोंड का कहना है कि उन्होंने कुलपति से मिलकर भी बातचीत की थी। जिसमें बताया था कि शैक्षणिक संस्था में व्यक्ति की पहचान उसके पद से होती है। उसमें वैवाहिक स्थिति की कोई जिक्र नहीं होनी चाहिए।

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डॉ. गोंड की मांग के बाद बीएचयू प्रशासन ने महिला महाविद्यालय की जो वरिष्ठता सूची जारी की है, उसमें अब महिला शिक्षकों के नाम के आगे केवल पद नाम ही लिखा है। जबकि इसके पहले 2019 में जारी सूची में पद नाम के आगे सुश्री और श्रीमती भी लिखा था। 
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पहली बार: महिला महाविद्यालय में अब रोटेशन पर सेक्शन हेड

महिला महाविद्यालय में पहली बार सेक्शन हेड पद पर रोटेशन की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। अब तक यहां जो सेक्शन हेड होता था, उसके इस पद पर रहने की कोई समय सीमा नहीं था।  अप्रैल महीने में पीपीसी की बैठक में कुछ शिक्षकों ने इसका प्रस्ताव रखा, जिस पर आंतरिक रुप से मुहर लगा दी गई। इसके पीछे विभागों में कार्यरत सभी शिक्षकों को सेक्शन हेड के रुप में कार्य करने का अनुभव होना ही मुख्य उद्देश्य माना गया है। 
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