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काशी विश्वनाथ मंदिर से अनोखी पहल: वाराणसी से तैयार होगा कश्मीर से केरल तक एक पंचांग, पढ़ें पूरी डिटेल्स

Fri, 29 Sep 2023 11:36 AM IST
किरन रौतेला आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी

सार

2023 में होली के बाद रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और फिर अब देव दीपावली की तिथि पर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। किसी ने उदया तिथि का तो किसी ने प्रदोषव्यापिनी तिथि का समर्थन किया है। ऐसे में आम जनता के सामने तो सबसे अधिक विकट स्थिति है कि वह किस तारीख को त्योहार मनाएं।
 
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पंचांग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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व्रत, तीज व त्योहारों की तिथियों पर पिछले कुछ वर्षों से बन रही भ्रम की स्थिति जल्द ही दूर होगी। एक देश-एक संविधान की तर्ज पर जल्द ही एक देश-एक पंचांग बनाया जाएगा। यह अनोखी पहल काशी विश्वनाथ मंदिर की चौखट से हुई है। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने पंचांगों में एकरूपता के लिए नई स्मृति निर्माण कराने का निर्णय लिया है। प्रयागराज महाकुंभ में यह नई स्मृति लोकार्पित होगी। इसके आधार पर ही एक देश-एक पंचांग का निर्माण किया जाएगा। स्मृति के निर्माण के लिए बीएचयू को केंद्र में रखा गया है।
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प्रो. पांडेय ने इसके लिए काशी के विद्वानों का आह्वान किया है। नवंबर में स्मृति निर्माण समिति की पहली बैठक होगी। इसमें धर्मशास्त्र, ज्योतिषविदों के अलावा पंचांगकारों को भी शामिल किया जाएगा। बीएचयू के ज्योतिष विभाग और वैदिक विज्ञान केंद्र में ही स्मृति निर्माण के लिए विद्वानों की बैठक भी प्रस्तावित की जाएगी।

कश्मीर से केरल तक एक पंचांग

प्रो. पांडेय ने बताया कि प्राचीन धर्मग्रंथों, स्मृति और पुराणों को आधार बनाकर, उसकी जांच पड़ताल करके सभी एक मन बनाकर नई स्मृति के निर्माण का श्रीगणेश करेंगे। तर्कसंगत मत और परंपराओं को ही इसमें स्थान दिया जाएगा। नई स्मृति को आधार बनाकर जब पंचांग का निर्माण होगा तो कश्मीर से केरल तक तिथि, त्योहार और व्रत में भ्रम की स्थिति नहीं होगी। इसमें पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक की परंपराओं और धर्मशास्त्रों का समावेश होगा। इससे सनातन धर्म की एकजुटता के साथ ही एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना भी साकार होगा।
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पंचांग - फोटो : अमर उजाला
स्मृति का अर्थ

धर्म, दर्शन, आचार-व्यवहार आदि से संबंध रखने वाले प्राचीन हिंदू धर्मशास्त्र जिनकी रचना ऋषि-मुनियों ने की थी। इसे प्राचीन हिंदू विधि संहिता भी कहा जाता है। इसके आधार पर तिथि, त्योहार और व्रत आदि का निर्धारण किया जाता है।

होली, दीपावली जैसे पर्वों पर भ्रम से लोग परेशान

2023 में होली के बाद रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और फिर अब देव दीपावली की तिथि पर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। किसी ने उदया तिथि का तो किसी ने प्रदोषव्यापिनी तिथि का समर्थन किया है। ऐसे में आम जनता के सामने तो सबसे अधिक विकट स्थिति है कि वह किस तारीख को त्योहार मनाएं।

काशी से प्रकाशित होने वाले पंचांग

काशी से निकलने वाले पंचांगों में विश्व पंचांग, श्री ऋषिकेश (काशी विश्वनाथ) पंचांग, बापूदेव शास्त्री प्रवर्तित दृक्सिद्ध पंचांग, ज्ञानमंडल सौर पंचांग, श्री महावीर पंचांग, श्री गणेश आपा पंचांग, ठाकुर प्रसाद पंचांग प्रमुख हैं।

तीन तरह के होते हैं पंचांग

हिंदू पंचांग तीन तरह के होते हैं। इसमें पहला चंद्र आधारित, दूसरा नक्षत्र आधारित और तीसरा सूर्य आधारित कैलेंडर पद्धति है। भिन्न-भिन्न रूप में यह पूरे भारत में माना जाता है। एक साल में 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीने में 15 दिन के दो पक्ष होते हैं- शुक्ल और कृष्ण।
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