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Ganga Vilas: वाराणसी पहुंचे केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, बोले- गंगा विलास क्रूज आत्मनिर्भर भारत की मिसाल

Thu, 12 Jan 2023 09:22 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

दुनिया के सबसे लंबा रिवर क्रूज गंगा विलास को पीएम मोदी शुक्रवार को  वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। रविदास घाट पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल गुरुवार को वाराणसी पहुंचे। 
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काशी विश्वनाथ धाम में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गंगा विलास क्रूज आत्मनिर्भर भारत की मिसाल है। नदी में चलने वाला दुनिया का सबसे बड़ा पूरी तरह स्वदेशी यह क्रूज भारतीय मेधा की पहचान है। यह क्रूज आने वाले समय में भारतीय तकनीक का लोहा मनवाएगा। उक्त बातें केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को रविदास घाट पर कहीं।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जलमार्ग संख्या एक से क्रूज का संचालन न सिर्फ नदी पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि जलमार्ग के जरिये व्यापार को गति प्रदान करेगा। नदियों के जरिये आवाजाही पर्यावरण के लिए अनुकूल है। इससे सड़क मार्ग पर अतिरिक्त दबाव भी कम होगा। 

अपस्ट्रीम में 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार
गंगा विलास क्रूज की अपस्ट्रीम में रफ्तार 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा है। डाउनस्ट्रीम में इसकी रफ्तार दोगुनी हो जाती है। क्रूज के संचालन में एक दिन में एक हजार लीटर डीजल खर्च होता है। इसकी ईंधन क्षमता 40 हजार लीटर की है। इस लिहाज से 40 दिन तक यह लगातार पानी पर तैर सकता है।

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सितंबर से क्रूज का नियमित संचालन

गंगा विलास क्रूज - फोटो : सोशल मीडिया
दुनिया की सबसे लंबी क्रूज यात्रा पर रवाना होने के लिए तैयार गंगा विलास क्रूज आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण है। क्रूज का इंटीरियर देश की संस्कृति और धरोहर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इंटीरियर में सफेद, गुलाबी, लाल और हल्के रंगों का इस्तेमाल किया गया है। वुडेन फ्लोरिंग और रंगों का बेहतर समन्वय पर्यटकों को सबसे अधिक पसंद आ रहा है। सितंबर से क्रूज का नियमित संचालन भी शुरू हो जाएगा।
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पानी की गहराई 1.4 मीटर होना जरूरी

क्रूज के संचालन के लिए पानी की गहराई 1.4 मीटर ही चाहिए, इसलिए कोलकाता से वाराणसी आते समय कहीं भी पानी की गहराई को लेकर परेशानी नहीं हुई। खराब मौसम के कारण ही परेशान होना पड़ा। बनारस से डिब्रूगढ़ की यात्रा के दौरान पर्यटकों के लिए 40 शहरों में ठहरने और घूमने के इंतजाम किए गए हैं।
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