कलशयात्रा में नाचते किन्नर समाज के लोग।
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किन्नर समाज ने बाबा को अर्पित किया गंगा जल
किन्नर समाज ने गुरु प्रदोष के दिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया। गुलिस्ता एकता सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष सलमा किन्नर अपने साथियों के साथ दशाश्वमेध घाट से जल लेकर बाबा के धाम पहुंचीं।
महादेव के जयघोष के साथ गंगा जल कलश में लेकर ढोल नगाड़ों पर नृत्य करते हुए गेट नंबर चार से सभी ने धाम में प्रवेश किया। बाबा विश्वनाथ को गंगा जल अर्पित करने के बाद सभी बाहर निकले।
महामंडलेश्वर पवित्रा ने कहा कि देश और प्रदेश की सुख और शांति की कामना से हम सभी ने जलाभिषेक किया है। सलमा और नितिन कुमार ने कहा कि यह काशी की गंगा जमुनी तहजीब है। इस दौरान रूपा किन्नर, मोहिनी किन्नर, सोनी किन्नर, सब्बो किन्नर, संजू किन्नर, आरोही किन्नर, रुबी किन्नर मौजूद रहे।
नंदीश्वर का पूजन करते पुरोहित।
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गुरु प्रदोष पर धाम में पूजे गए नंदीश्वर
गुरु प्रदोष पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्री नंदीश्वर उत्सव मनाया गया। नंदी भगवान का पंचामृत से अभिषेक और पूजन किया गया। नंदी आराधना से भक्त का मन स्थिर रहता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मान्यता है कि प्रदोष काल में प्रथम पूजन नंदी भगवान का करना चाहिए। इससे भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं। 11 आचार्यों ने श्रद्धालुओं के साथ सातवां श्री नंदीश्वर उत्सव मनाया गया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के न्यासी वेंकट रमण घनपाठी ने समारोह के याजक की भूमिका का निर्वाह किया।
भगवान गुरु बृहस्पति ने किया जल विहार, भक्त दर्शन कर हुए निहाल
सावन में देव गुरु बृहस्पति भगवान के शृंगार और पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है। इस मास के दूसरे बृहस्पतिवार को देवगुरु की जलविहार की झांकी सजाई गई। 16 बंडल यानी आठ किलो रुइयों से गर्भगृह से लेकर मंदिर सजा था। इससे पहाड़ के झरने का रूप दिया गया। दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ लगी थी। भजन संध्या में कलाकारों ने बाबा की महिमागान किया।
मंदिर के महंत अजय गिरी के आचार्यत्व में 11 वैदिक ब्राह्मणों ने देवगुरु का शृंगार किया। सुबह पंचामृत स्नान के बाद चंदन का लेपन हुआ। स्वर्ण मुखौटा, चांदी का छत्र व शेषनाग के साथ देवगुरु को सपरिवार विराजमान कराया गया। मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन शुरू हो गया। दिन में रुद्राभिषेक व भोग आरती हुई।
मुख्य द्वार से गर्भगृह तक अशोक व कामिनी की पत्तियों और रुइयों से झरना बनाया गया था। भजन संध्या में प्रवीण सिंह की टीम ने भजनों से देव गुरु के दरबार में हाजिरी लगाई। पं. अजय गिरी ने बताया कि तीसरे बृहस्पतिवार को देवगुरु का फल और अंतिम बृहस्पतिवार को हिम शृंगार होगा।