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Sawan 2024: गुरु प्रदोष पर दो लाख से अधिक शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक, केसरियामय हुई शिव की नगरी

Fri, 02 Aug 2024 12:21 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: सावन माह में पड़ने वाले गुरु प्रदोष का विशेष महत्व है। इस दिन शिवभक्त बाबा काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक को लेकर लालायित दिखे। विश्वनाथ धाम का पट खुलते ही हर-हर महादेव का नारा गुंजायमान हो गया।
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शिव की नगरी काशी में कांवड़ियों का जमावड़ा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुरु प्रदोष पर शिव की नगरी काशी केसरियामय हो उठी। प्रयागराज से वाराणसी मार्ग पर बोल-बम का जयकारा लगाते कांवड़ियों का रेला उमड़ा तो उनकी सेवा करने वालों में भी होड़ मच गई। रोहनिया से लेकर श्री काशी विश्वनाथ धाम में रास्ते भर जगह-जगह सेवा शिविरों में कांवड़ियों की ही भीड़ नजर आई। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दो लाख से अधिक शिवभक्तों ने जलाभिषेक किया।

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बृहस्पतिवार को गुरु प्रदोष के संयोग में बाबा को जल चढ़ाने वालों की भारी भीड़ रही। मंगला आरती से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला शयन आरती तक अनवरत जारी रहा। धाम क्षेत्र के सभी प्रवेश द्वार से कांवड़ियों को प्रवेश दिया जा रहा था। 

भोर में मंगला आरती के बाद और शाम को प्रदोष काल में जल चढ़ाने वालों की भीड़ सबसे अधिक रही। मंदिर की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार दो लाख से अधिक शिवभक्तों ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया।
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कांवड़ यात्रा के शहर में प्रवेश के प्रमुख मार्ग मड़ौली-मंडुवाडीह मार्ग पर कांवड़ियों की सेवा के लिए होड़ सी मची थी। एक तरफ मड़ौली से मंडुवाडीह तक हर जगह बोल बम का जयघोष करते कांवड़ियों की कतार ही नजर आ रही थी तो वहीं विभिन्न सेवा समितियों के लोग उनकी सेवा में जुटे रहे। 

मंडुवाडीह में बोल बम सेवा समिति के बैनर तले सत्यम जायसवाल, आशीष प्रजापति, विशाल प्रजापति, बबलू मोर्य, शशि जायसवाल कांवड़ियों की सेवा में लगे रहे। कोई कांवड़ियों के पांव के छालों व घाव पर पट्टी बांध रहा था तो कोई प्यास बुझाने के लिए शरबत व पानी पिला रहा था। कांवड़ियों के लिए फलाहारी नाश्ते का इंतजाम भी किया गया था।

कलशयात्रा में नाचते किन्नर समाज के लोग। - फोटो : अमर उजाला
किन्नर समाज ने बाबा को अर्पित किया गंगा जल
किन्नर समाज ने गुरु प्रदोष के दिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया। गुलिस्ता एकता सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष सलमा किन्नर अपने साथियों के साथ दशाश्वमेध घाट से जल लेकर बाबा के धाम पहुंचीं। 

महादेव के जयघोष के साथ गंगा जल कलश में लेकर ढोल नगाड़ों पर नृत्य करते हुए गेट नंबर चार से सभी ने धाम में प्रवेश किया। बाबा विश्वनाथ को गंगा जल अर्पित करने के बाद सभी बाहर निकले। 

महामंडलेश्वर पवित्रा ने कहा कि देश और प्रदेश की सुख और शांति की कामना से हम सभी ने जलाभिषेक किया है। सलमा और नितिन कुमार ने कहा कि यह काशी की गंगा जमुनी तहजीब है। इस दौरान रूपा किन्नर, मोहिनी किन्नर, सोनी किन्नर, सब्बो किन्नर, संजू किन्नर, आरोही किन्नर, रुबी किन्नर मौजूद रहे।

नंदीश्वर का पूजन करते पुरोहित। - फोटो : अमर उजाला
गुरु प्रदोष पर धाम में पूजे गए नंदीश्वर
गुरु प्रदोष पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्री नंदीश्वर उत्सव मनाया गया। नंदी भगवान का पंचामृत से अभिषेक और पूजन किया गया। नंदी आराधना से भक्त का मन स्थिर रहता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 

मान्यता है कि प्रदोष काल में प्रथम पूजन नंदी भगवान का करना चाहिए। इससे भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं। 11 आचार्यों ने श्रद्धालुओं के साथ सातवां श्री नंदीश्वर उत्सव मनाया गया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के न्यासी वेंकट रमण घनपाठी ने समारोह के याजक की भूमिका का निर्वाह किया। 
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भगवान गुरु बृहस्पति ने किया जल विहार, भक्त दर्शन कर हुए निहाल
सावन में देव गुरु बृहस्पति भगवान के शृंगार और पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है। इस मास के दूसरे बृहस्पतिवार को देवगुरु की जलविहार की झांकी सजाई गई। 16 बंडल यानी आठ किलो रुइयों से गर्भगृह से लेकर मंदिर सजा था। इससे पहाड़ के झरने का रूप दिया गया। दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ लगी थी। भजन संध्या में कलाकारों ने बाबा की महिमागान किया।

मंदिर के महंत अजय गिरी के आचार्यत्व में 11 वैदिक ब्राह्मणों ने देवगुरु का शृंगार किया। सुबह पंचामृत स्नान के बाद चंदन का लेपन हुआ। स्वर्ण मुखौटा, चांदी का छत्र व शेषनाग के साथ देवगुरु को सपरिवार विराजमान कराया गया। मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन शुरू हो गया। दिन में रुद्राभिषेक व भोग आरती हुई। 

मुख्य द्वार से गर्भगृह तक अशोक व कामिनी की पत्तियों और रुइयों से झरना बनाया गया था। भजन संध्या में प्रवीण सिंह की टीम ने भजनों से देव गुरु के दरबार में हाजिरी लगाई। पं. अजय गिरी ने बताया कि तीसरे बृहस्पतिवार को देवगुरु का फल और अंतिम बृहस्पतिवार को हिम शृंगार होगा।
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