शहर की सीवर व्यवस्था सिर्फ और सिर्फ शाही नाले पर ही निर्भर है। वो शाही नाला जिसे मुगलों ने सुरंग के रूप में विकसित किया था। बाद में ब्रिटिश हुकूमत ने उसे सीवर व्यवस्था में तब्दील कर दिया। नाले की उम्र 200 साल से भी ज्यादा हो गई। जगह-जगह तोड़फोड़ कर लोगों ने अपनी सीवर लाइन जुड़वा ली है। नतीजा यह नाला भी जीर्ण-शीर्ण हो गया।
पांच साल में पूरी कराई थी शाही नाले की सफाई
अगस्त 2015 में शाही नाले की मरम्मत और सफाई का टेंडर श्रीराम कंपनी को दिया गया। कंपनी ने जनवरी 2016 में काम शुरू किया। दिसंबर 2017 तक काम पूरा करना था। काम पूरा न होने पर समय सीमा बढ़ाकर मार्च 2018 कर दी गई। इसके बाद मियाद फिर जुलाई तक बढ़ाई गई मगर काम पूरा नहीं हुआ। वहीं, तत्कालीन प्रदेश के नगर विकास मंत्री ने पांच बार मियाद बढ़ाई थी। 2020 में काम पूरा हुआ, लेकिन बहुत अधिक सफलता नहीं मिली। जेएनएनयूआरएम के तहत गिरिजाघर से लेकर चेतगंज तक सड़क की दोनों तरफ मोटी-मोटी पाइप लाइन बिछाई गई थी।
बोले अधिकारी
पुरानी पाइपलाइनों को बदलने का काम चल रहा है। सीवर ओवरफ्लो की समस्या जहां से आती है। वहां जांच कर जरूरत के अनुसार बड़ी व्यास वाली पाइपलाइन डाली जा रही है। - विजय नारायण मौर्य, महाप्रबंधक जलकल
सूजाबाद वार्ड में चंदा लगाकर लोग ऊंची कर रहे गली
रामनगर के सूजाबाद वार्ड में चंदा लगाकर लोग गली ऊंची कर रहे हैं। यहां पर नालियों से गंदा पानी गली में आने की समस्या से लोग परेशान हैं। कई बार निगम के अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ। मेयर अशोक कुमार तिवारी से शिकायत की गई तो उन्होंने मौके पर मशीन भेजकर नाला और नालियों की सफाई करवाई थी।
क्षेत्र के महेंद्र यादव और मनोज यादव ने बताया कि सड़क किनारे नाले का निर्माण किया गया था। इस नाले की सफाई अब तक नहीं हुई है। नाला जाम होने पर गली में गंदा पानी ओवरफ्लो कर रहा है। इससे बचने के लिए लोग मिट्टी डालकर गली को ऊंची कर रहे हैं। पार्षद शांति देवी ने बताया कि यहां पर छह करोड़ रुपये के कार्य का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
चुनाव बाद कार्य कराए जाएंगे। नाला सफाई का काम अगले महीने से शुरू हो जाएगा। इसके लिए भी नगर आयुक्त और मेयर को प्रस्ताव दिया जा चुका है। छोटे कार्य तो तत्काल करा रहे हैं। चुनाव आचार संहिता के चलते बड़े काम चुनाव बाद कराया जाएगा।