चुनावी माहौल में हिस्ट्रीशीटरों की नियमित निगरानी न होना कमिश्नरेट की कानून व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है। मौजूदा समय में कमिश्नरेट के 1504 हिस्ट्रीशीटरों में से 278 हिस्ट्रीशीटर ऐसे हैं, जिनके बारे में पुलिस को कोई ठोस जानकारी नहीं है। हिस्ट्रीशीटरों की नियमित निगरानी न होने से हाल के दिनों में शांति और कानून व्यवस्था के लिहाज से दुष्परिणाम भी देखने को मिले हैं।
हिस्ट्रीशीटर ने की हिस्ट्रीशीटर की हत्या
मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के जलालीपट्टी नई बस्ती में गत 21 मार्च की रात हिस्ट्रीशीटर सोनू यादव की हत्या गोली मार कर की गई थी। वारदात को अंजाम देने में एक अन्य हिस्ट्रीशीटर रवि पटेल उर्फ वीरू की अहम भूमिका रही। पुलिस अफसरों के सामने स्थानीय लोगों का कहना था कि दोनों हिस्ट्रीशीटर की नियमित निगरानी न होने की वजह से आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई में वारदात को अंजाम दिया गया।
असलहा लेकर घूम रहा हिस्ट्रीशीटर पकड़ा गया
रोहनिया थाने का हिस्ट्रीशीटर गंगापुर निवासी बबलू खान लोगों को अर्दब में लेने के लिए तमंचा खोस कर घूम रहा था। इसकी सूचना पाकर गत 22 मार्च को रोहनिया थाने की पुलिस ने उसे करमुल्ला चौराहा, गंगापुर से गिरफ्तार किया था।
जमीन खाली करने के लिए हिस्ट्रीशीटर ने धमकाया
तुलसीपुर इलाके में जमीन खरीदकर सोहन सोनकर ने जमीन खरीद कर कब्जा लिया। हिस्ट्रीशीटर सतीश सोनकर सोहन सोनकर को अकारण ही फोन कर धमकाने लगा और जमीन खाली करने को कहा। सोहन की शिकायत पर सतीश के खिलाफ भेलूपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
बोले अधिकारी
सभी थानाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश है कि हिस्ट्रीशीटरों की नियमित निगरानी में लापरवाही कतई न बरती जाए। थानाध्यक्ष को उनके थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटरों की गतिविधियों की जानकारी होनी चाहिए। इसके बावजूद यदि निगरानी में लापरवाही उजागर होगी तो संबंधित थानाध्यक्ष कार्रवाई की जद में आएंगे।
- मोहित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त