वाराणसी का वन विभाग कछुओं की तस्करी रोकने के लिए हमेशा अलर्ट रहता है। इसके बावजूद शातिर तस्कर कोई न कोई तरीका निकाल ही लेते हैं। पिछले साल चार बार तस्करी के मामले सामने आए थे।
जिले में दक्षिण एशिया में पाए जाने वाले भारतीय फ्लैपशेल (लिसेमिस पंक्टाटा) प्रजाति के कछुओं की तस्करी चिंता का विषय है। वन विभाग ने पिछले चार साल में 1200 से ज्यादा कछुओं को अवैध तस्करी के दौरान बरामद किया।
विज्ञापन
इनमें से 1079 कछुए को गंगा नदी में छोड़ा गया। इसमें लिसेमिस पंक्टाटा, सुंदरी प्रजाति और बवागुर ढोगोका प्रजाति के कछुए शामिल हैं। पिछले साल 2024 में सबसे ज्यादा 4 बार कछुए की तस्करी के मामला सामने आए। वहीं, इस साल एक महीने में ही एक मामला आ गया है।
कछुआ पुनर्वास केंद्र प्रभारी निशिकांत सोनकर ने बताया 2020 में 678, 2021 को 100, 2022 में 140, 2023 में 207, 2024 में 136 कुछए बरामद हुए। पिछले साल के बरामद कछुए आज भी सुरक्षित हैं।
विज्ञापन
इन कछुओं के पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद ही विभाग इन्हें गंगा में छोड़ेगा। कई लोग कछुए को मांस और अंडों के लिए खरीदते हैं, जो उनकी तस्करी को बढ़ावा देता है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार और स्थानीय अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं।
यहां पाए जाते हैं लिसेमिस पंक्टाटा प्रजाति के कछुए
लिसेमिस पंक्टाटा दक्षिण एशिया में पाया जाने वाला मीठे पानी का कछुआ है। इसकी त्वचा के फ्लैप अंगों को तब ढकते हैं जब वे खोल में वापस आ जाते हैं। ये दक्षिण एशियाई प्रांतों में व्यापक और आम हैं। यह मुख्यत: सॉफ्टशेल और हार्डशेल जलीय कछुओं के बीच एक विकासवादी कड़ी है।